राजू सांडिल बोले—चेक डैम टूटने से सारंडा के जंगल, नदी-नालों और खेतों को हुए नुकसान पर NGT जाएंगे
GPS आधारित फोटो-वीडियोग्राफी से जुटाए जा रहे साक्ष्य, स्वतंत्र एजेंसी के साथ तैयार होगी रिपोर्ट
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले सेल की गुवा खदान अंतर्गत रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार एवं पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग को लेकर 10 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन 14 अगस्त को लगातार पांचवें दिन भी शांतिपूर्ण रूप से जारी रहा। मानकी लागुड़ा देवगम, गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल, झामुमो नेता बृंदावन गोप तथा विभिन्न गांवों के मुंडाओं के नेतृत्व में ग्रामीण और बेरोजगार युवा मैगजीन लेबल क्षेत्र में डटे रहे।
पिछले दिन हुई भारी बारिश के विपरीत पांचवें दिन मौसम अपेक्षाकृत ठीक रहा। इससे आंदोलनकारियों को किसी विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और ग्रामीणों ने सामान्य रूप से पूरे दिन आंदोलन जारी रखा।

सेल अधिकारी ने फोन पर वार्ता के लिए किया संपर्क
मुखिया राजू सांडिल ने बताया कि आंदोलन के दौरान सेल के एक अधिकारी ने फोन पर उनसे संपर्क कर वार्ता की बात कही है। हालांकि, उनके अनुसार अधिकारी की ओर से पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू करने के मुद्दे पर अभी तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है।
राजू सांडिल ने कहा कि ग्रामीण पहले भी वार्ता और समझौते पर भरोसा कर चुके हैं, लेकिन समझौते के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का अनुपालन नहीं होने के कारण इस बार आंदोलन शुरू किया गया है। इसलिए केवल मौखिक वार्ता से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। ग्रामीणों को लिखित समझौते के अनुपालन को लेकर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहिए।
चेक डैम टूटने के मामले को लेकर NGT जाने की तैयारी
राजू सांडिल ने 13 अगस्त को गुवा खदान क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित बताए जा रहे RCC चेक डैम के टूटने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चेक डैम के टूटने से भारी मात्रा में पानी और मलबे के बहाव ने सारंडा जंगल के पेड़-पौधों, प्राकृतिक नदी-नालों तथा विभिन्न गांवों के खेतों को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर जल्द ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में स्वतंत्र एजेंसी के साथ मिलकर मामला दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
GPS आधारित साक्ष्य जुटाने का दावा
राजू सांडिल ने बताया कि कथित पर्यावरणीय नुकसान का वास्तविक आकलन करने के लिए GPS आधारित फोटो, वीडियोग्राफी, विशेषज्ञ कैमरा और विशेषज्ञ टीम की मदद से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि चेक डैम टूटने से प्रभावित क्षेत्र, नदी-नालों, जंगल और ग्रामीणों की कृषि भूमि की स्थिति का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एशिया के प्रमुख साल वन क्षेत्रों में शामिल सारंडा जंगल को कथित तौर पर हुए नुकसान का विस्तृत प्रमाण जुटाकर NGT के समक्ष रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
‘जंगल और जमीन के नुकसान का वैज्ञानिक आकलन जरूरी’
राजू सांडिल ने कहा कि मामला केवल एक चेक डैम टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक अध्ययन आवश्यक है। जंगल, प्राकृतिक जलधाराओं और कृषि भूमि पर पड़े प्रभाव का स्वतंत्र और वैज्ञानिक तरीके से आकलन कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में पर्यावरणीय क्षति के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि रांजाबुरु खदान में शुरू हुआ आंदोलन फिलहाल समाप्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों की मुख्य मांगों में पूर्व में हुए लिखित समझौते का अनुपालन, खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी तथा प्रदूषण एवं पर्यावरणीय नुकसान से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई शामिल है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित समझौते के धरातल पर क्रियान्वयन और पर्यावरणीय नुकसान पर जवाबदेही चाहिए। जब तक इन मुद्दों पर स्पष्ट और ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।






















