स्थानीय रोजगार और पूर्व में हुए लिखित समझौते के पूर्ण अनुपालन पर अड़े ग्रामीण, मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार समेत पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग को लेकर 10 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन 19 अगस्त को लगातार दसवें दिन भी यथावत जारी रहा। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले चल रहे आंदोलन में विभिन्न गांवों के ग्रामीण, महिला-पुरुष, बेरोजगार युवा, मुंडा एवं ग्रामीण प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं।

मां सरला ठेका कंपनी से हुए समझौते के अनुपालन की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि पूर्व में मां सरला नामक ठेका कंपनी के साथ स्थानीय रोजगार एवं अन्य मांगों को लेकर लिखित समझौता हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि समझौते में तय कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। मां सरला ठेका कंपनी को पूर्व में किए गए लिखित समझौते के सभी बिंदुओं को धरातल पर लागू करना होगा।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी तथा समझौते में तय अन्य कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को अवसर देना शामिल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदान क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के पर्याप्त संख्या में बेरोजगार रहने के बावजूद विभिन्न कार्यों में बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। इसे लेकर ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बनी हुई है।
दस दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन
आंदोलन का आज दसवां दिन रहा। आंदोलनकारी मैगजीन लेबल क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन के दौरान किसी प्रकार का टकराव पैदा करना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन अपने अधिकारों और रोजगार की मांग को लेकर वे पीछे हटने वाले भी नहीं हैं।
‘मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा’
आंदोलनकारियों ने कहा कि मां सरला ठेका कंपनी द्वारा पूर्व में किए गए लिखित समझौते की सभी शर्तों को पूरी तरह लागू किए जाने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
ग्रामीणों ने दोहराया कि “जब तक समझौते के अनुसार हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।” दसवें दिन भी ग्रामीणों की एकजुटता बरकरार रही और उन्होंने स्थानीय रोजगार एवं अपने अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।














