मां सरला ठेका कंपनी से हुए लिखित समझौते को लागू कराने की मांग, आंदोलनकारियों की एकजुटता बरकरार
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
गुवा। रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार समेत पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू कराने की मांग को लेकर 10 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन 21 अगस्त को लगातार 12वें दिन भी यथावत जारी रहा। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले चल रहे आंदोलन में विभिन्न गांवों के ग्रामीण, महिला-पुरुष, बेरोजगार युवा, मुंडा एवं ग्रामीण प्रतिनिधि लगातार अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।

मां सरला ठेका कंपनी से हुए समझौते के अनुपालन की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि पूर्व में मां सरला नामक ठेका कंपनी के साथ स्थानीय रोजगार एवं अन्य मांगों को लेकर लिखित समझौता हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि समझौते में तय कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में 10 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि अब केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। पूर्व में किए गए लिखित समझौते के सभी बिंदुओं को धरातल पर लागू करना होगा।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय लोगों की भागीदारी तथा समझौते में तय अन्य कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को अवसर देना शामिल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदान क्षेत्र में स्थानीय युवा बेरोजगार हैं, जबकि विभिन्न कार्यों में बाहरी लोगों को रोजगार दिए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
12 दिनों से जारी है आंदोलन
10 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलनकारी लगातार मैगजीन लेबल क्षेत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से डटे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार 12 दिनों तक आंदोलन चलने के बावजूद उनकी मांगों पर अभी तक ऐसा ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे आंदोलन समाप्त करने की स्थिति बने।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
सारंडा विकास समिति के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में ग्रामीणों ने एक बार फिर दोहराया कि मां सरला ठेका कंपनी से हुए लिखित समझौते की सभी मांगों को पूरी तरह लागू किए जाने तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। 12वें दिन भी ग्रामीणों की एकजुटता कायम रही और आंदोलन शांतिपूर्ण रूप से जारी रहा।














