रिपोर्ट : शैलेश सिंह
दुबिल ग्राम सभा द्वारा सेल की चिड़िया खदान प्रबंधन के खिलाफ रोजगार, पेयजल समेत विभिन्न मांगों को लेकर 16 दिनों तक आंदोलन कर खदान का कामकाज ठप रखने के बाद भी ग्रामीणों की समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं। आंदोलन के बाद प्रबंधन द्वारा गांव के खराब चापाकल की मरम्मत कराई गई, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार मरम्मत के बाद यह चापाकल एक दिन भी ठीक से नहीं चल सका और फिर खराब हो गया।

ग्रामीण दर्शन चांपिया ने बताया कि चिड़िया खदान क्षेत्र से वर्षा के मौसम में लगातार मिट्टी, मुरूम, लाल पानी और लौह चूर्ण बहकर गांव की ओर आ रहा है। इसके कारण खेतों के साथ-साथ नदी और नालों का पानी भी दूषित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान से बहकर आने वाले लाल पानी और लौह चूर्ण के कारण कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच रही है तथा प्राकृतिक जलस्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक ओर खदान से निकलने वाला दूषित पानी ग्रामीणों के जलस्रोतों को प्रभावित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पीने के लिए शुद्ध पानी की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। आंदोलन के दौरान पेयजल समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
दर्शन चांपिया ने कहा कि प्रबंधन द्वारा चापाकल की मरम्मत कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेना उचित नहीं है। ग्रामीणों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उन्होंने सेल प्रबंधन से तत्काल खराब चापाकल को दुरुस्त कराने, वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था करने तथा खदान से बहकर आने वाले लाल पानी, मिट्टी और लौह चूर्ण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र स्थायी समाधान नहीं किया गया तो दुबिल ग्राम सभा के ग्रामीण एक बार फिर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि खदान संचालन के साथ-साथ प्रभावित गांवों के पर्यावरण, कृषि भूमि और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रबंधन को निभानी होगी।













