31 अगस्त से झारखंड में लागू हुआ SOR 2026, फिर पुराने दर पर प्राक्कलन और निविदा क्यों? JMM जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने DC को लिखा पत्र
नए SOR के बाद पुराने प्राक्कलनों को प्रशासनिक स्वीकृति देने पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के दर निर्धारण कोषांग द्वारा 31 अगस्त 2026 से नया SOR 2026 लागू किए जाने के बाद DMFT (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) की योजनाओं के प्राक्कलन और निविदा प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल सीधा है—जब राज्य में नया SOR लागू हो चुका है, तो फिर पुराने SOR 2022 के आधार पर तैयार प्राक्कलनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर उसी पुराने दर पर निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कवायद क्यों?
इसी मुद्दे को लेकर झामुमो पश्चिमी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने उपायुक्त मनीष कुमार को पत्र लिखकर DMFT की योजनाओं में नए SOR 2026 का अनिवार्य रूप से अनुपालन कराने की मांग की है।

31 अगस्त से बदल गया दर निर्धारण का आधार
दर निर्धारण कोषांग द्वारा 31.08.2026 से SOR 2026 प्रभावी कर दिया गया है। ऐसे में नई योजनाओं के प्राक्कलन में वर्तमान अनुसूचित दर को आधार बनाना आवश्यक माना जा रहा है।
DMFT की कई योजनाएं अब भी पुराने SOR 2022 पर!
सोनाराम देवगम के अनुसार DMFT से संबंधित चयनित एवं अनुशंसित कई योजनाओं का प्राक्कलन विभिन्न प्रमंडलों एवं कार्यकारी एजेंसियों द्वारा SOR 2022 के आधार पर तैयार किया गया था।
इनमें से कई प्राक्कलनों को तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद प्रशासनिक स्वीकृति के लिए DMFT सेल में भी समर्पित किया जा चुका है।

नया SOR लागू, फिर पुराने दर पर प्रशासनिक स्वीकृति क्यों?
यही पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
जब SOR 2026 लागू हो चुका है, तो क्या केवल पूर्व में प्राक्कलन तैयार होने या तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के आधार पर पुराने SOR 2022 को जारी रखा जा सकता है?
सोनाराम देवगम ने मांग की है कि पुराने SOR पर तैयार प्राक्कलनों की नए SOR 2026 के अनुसार समीक्षा और आवश्यक संशोधन कराया जाए तथा इसके बाद ही प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
पुराने SOR पर निकली निविदा तो उठेंगे गंभीर सवाल
JMM जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि नए SOR के लागू होने के बाद पुराने SOR 2022 के आधार पर निविदा आमंत्रित करना नियमों के विपरीत होगा।
उनका कहना है कि यदि पुराने दर पर तैयार अथवा स्वीकृत प्राक्कलन के आधार पर निविदा जारी की जाती है, तो आगे चलकर इसकी तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
तकनीकी स्वीकृति मिल गई तो भी मामला खत्म नहीं
कई DMFT योजनाओं को तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन केवल तकनीकी स्वीकृति मिल जाने से पुराने SOR को बनाए रखना उचित नहीं माना जा सकता।
नया SOR प्रभावी होने के बाद संबंधित योजनाओं के प्राक्कलन को वर्तमान अनुसूचित दर के अनुरूप रिवाइज्ड करना जरूरी होगा।

सभी संबंधित विभागों और प्रमंडलों को भेजी जा चुकी है सूचना
सोनाराम देवगम के अनुसार नए SOR 2026 के संबंध में जानकारी राज्य के संबंधित विभागाध्यक्षों एवं विभिन्न प्रमंडलों को भेजी जा चुकी है। ऐसे में कार्यकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे नई दरों के अनुरूप प्राक्कलन तैयार करें।
विभागों में पुराने DPR को रिवाइज करने की प्रक्रिया शुरू
उन्होंने बताया कि विभाग स्तर पर SOR 2022 के आधार पर स्वीकृत योजनाओं के DPR को नए SOR 2026 के अनुसार रिवाइज्ड करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अन्य विभागों में पुराने DPR को नई दरों के अनुसार संशोधित किया जा रहा है, तो DMFT योजनाओं में पुराने SOR को आधार बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत क्यों पड़े?
पुराना SOR बनाम नया SOR—अब स्थिति स्पष्ट करनी होगी
नए SOR के लागू होने से योजनाओं की अनुमानित लागत प्रभावित होना स्वाभाविक है। ऐसे में पुराने और नए दरों के बीच अंतर को नजरअंदाज कर निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर भविष्य में वित्तीय विसंगति, तकनीकी आपत्ति और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
DMFT योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर
सोनाराम देवगम ने उपायुक्त से मांग की है कि DMFT से संबंधित सभी योजनाओं में SOR 2026 का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि प्राक्कलन से लेकर प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा तक पूरी प्रक्रिया नियमसम्मत एवं पारदर्शी रहे।
DC के सामने रखी गई सीधी मांग
JMM जिलाध्यक्ष ने उपायुक्त मनीष कुमार से मांग की है कि जिन DMFT योजनाओं का प्राक्कलन SOR 2022 के आधार पर तैयार किया गया है, उन्हें SOR 2026 के अनुसार रिवाइज्ड कराया जाए।
इसके बाद ही संबंधित योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
पुराने दर पर निविदा हुई तो कौन लेगा जिम्मेदारी?
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन के सामने है—क्या 31 अगस्त 2026 से नया SOR लागू होने के बावजूद पुराने SOR 2022 पर तैयार प्राक्कलनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर निविदा निकाली जाएगी?
यदि ऐसा होता है तो भविष्य में इन योजनाओं की प्राक्कलन दर, प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठना तय माना जा रहा है।
नियमों से समझौता नहीं होना चाहिए : सोनाराम देवगम
सोनाराम देवगम का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा नया SOR लागू किए जाने के बाद विकास योजनाओं के प्राक्कलन एवं निविदा प्रक्रिया में उसी को आधार बनाया जाना चाहिए। पुराने SOR के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाना नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर सकता है।

बयान
“मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के दर निर्धारण कोषांग द्वारा 31 अगस्त 2026 से नया SOR लागू किया गया है। इसलिए DMFT से संबंधित योजनाओं का प्राक्कलन भी नए SOR 2026 के अनुसूचित दर के आधार पर बनाया जाना आवश्यक है। पुराने SOR 2022 के दर पर निविदा आमंत्रित करना नियम विरुद्ध होगा। विभाग स्तर पर पुराने SOR पर स्वीकृत योजनाओं के DPR को नए SOR के अनुसार रिवाइज्ड करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।”
** सोनाराम देवगम, जिलाध्यक्ष, झामुमो, पश्चिमी सिंहभूम**
अब निगाह प्रशासन के अगले कदम पर
DMFT की योजनाओं को लेकर उठे इस सवाल ने अब प्रशासन के सामने एक स्पष्ट चुनौती खड़ी कर दी है। नया SOR 2026 लागू होने के बाद पुराने SOR 2022 पर तैयार प्राक्कलनों का क्या होगा?
क्या उन्हें नए दर के अनुसार संशोधित कराया जाएगा या पुराने दर पर ही प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी?
अब निगाह उपायुक्त मनीष कुमार और DMFT सेल की अगली कार्रवाई पर टिकी है। प्रशासन द्वारा इस मामले में लिया जाने वाला निर्णय न केवल DMFT योजनाओं की लागत और निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि नियमों के अनुपालन और वित्तीय पारदर्शिता की दिशा भी तय करेगा।














