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“हिंदी को जन-जन की भाषा बनाएं, सिर्फ पखवाड़े तक सीमित न रखें” : पी.एम. शिरपुरकर

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किरीबुरू में हिंदी पखवाड़ा का भव्य समापन, बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां; विजेता प्रतिभागी हुए सम्मानित

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

किरीबुरू। “हिंदी हमारी राजभाषा है। इसे केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय जन-जन की भाषा बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास होना चाहिए। किरीबुरू जैसे बहुभाषी औद्योगिक क्षेत्र में हिंदी अलग-अलग भाषा और संस्कृति से जुड़े लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने वाली मजबूत कड़ी है। इसलिए हिंदी को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी केवल हिंदी विभाग की नहीं, बल्कि हम सभी की है।”

यह बात सेल किरीबुरू के मुख्य महाप्रबंधक पी.एम. शिरपुरकर ने शनिवार को सामुदायिक भवन में सेल किरीबुरू प्रबंधन के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित हिंदी पखवाड़ा-2026 के भव्य समापन समारोह को संबोधित करते हुए कही। उनके इस संदेश ने पूरे समारोह को हिंदी के प्रचार-प्रसार और व्यवहारिक प्रयोग के संकल्प से जोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक विकसित देशों में उनकी अपनी प्रमुख भाषा सामाजिक और प्रशासनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत भाषायी और सांस्कृतिक विविधता वाला देश है, ऐसे में हिंदी विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि सेल के खदान क्षेत्रों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए अधिकारी, कर्मचारी और श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे वातावरण में हिंदी लोगों के बीच संवाद को सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

“प्रतियोगिताओं से हिंदी को समाज से जोड़ने का प्रयास”

सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर ने कहा कि किरीबुरू प्रबंधन हिंदी को केवल कार्यालयीन भाषा के रूप में बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों, महिलाओं और विद्यार्थियों को जोड़कर विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन इसी उद्देश्य से किया जाता है, ताकि हिंदी के प्रति रुचि और अपनापन समाज के प्रत्येक वर्ग में बढ़े।

उन्होंने कहा कि भाषा तभी मजबूत होती है, जब उसका प्रयोग जीवन के सामान्य व्यवहार में बढ़े। इसलिए हिंदी में लिखने, बोलने और अपने विचार व्यक्त करने के अवसर लगातार उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

14 सितंबर से शुरू हुआ था हिंदी पखवाड़ा

सेल किरीबुरू में हिंदी पखवाड़े की शुरुआत 14 सितंबर से हुई थी। इसके तहत 15 से 21 सितंबर तक अलग-अलग वर्गों में विविध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, सेल कर्मियों, ठेका श्रमिकों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

पेंटिंग, कविता पाठ, आशुभाषण, वाद-विवाद, निबंध लेखन, कार्यालयीन पत्र-लेखन, श्रुतिलेख, क्विज प्रतियोगिता तथा महिला वर्ग के कविता पाठ जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

समापन समारोह में इन प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा हिंदी में सर्वाधिक कार्य करने के लिए प्रदत्त पुरस्कार डॉ. मधुसूदन दास और बबन शर्मा को प्रदान किया गया।

 

डी. सतपति : हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक पहल जरूरी

सीजीएम (एचआर) डी. सतपति ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग कार्यालयीन कार्यों के साथ-साथ दैनिक जीवन में भी बढ़ना चाहिए।

उन्होंने हिंदी पखवाड़े के दौरान विभिन्न वर्गों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से कर्मचारियों और विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ती है।

 

मनीष राय : हिंदी केवल दो सप्ताह का उत्सव नहीं

महाप्रबंधक मनीष राय ने कहा कि हिंदी राष्ट्र को जोड़ने वाली भाषा है। हिंदी पखवाड़ा केवल एक-दो सप्ताह मनाया जाने वाला उत्सव नहीं होना चाहिए। हिंदी के सम्मान और प्रयोग की प्रक्रिया पूरे वर्ष जारी रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिंदी का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब कार्यालयीन कार्यों के साथ सामाजिक जीवन में भी इसका सहज और सम्मानजनक प्रयोग बढ़े।

 

एस.एस. सिद्धार : हिंदी अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ने वाली भाषा

महाप्रबंधक एस.एस. सिद्धार ने कहा कि हिंदी देशवासियों को एक सूत्र में बांधने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल हिंदी भाषी राज्यों तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी हिंदी को लोग बोलते और समझते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की भाषायी विविधता उसकी पहचान है और हिंदी इस विविधता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर लोगों को जोड़ती है।

 

मंगलदीप प्रज्वलित कर हुआ समारोह का शुभारंभ

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर, विशिष्ट अतिथि सीजीएम (एचआर) डी. सतपति, महाप्रबंधक अमित कुमार विश्वास, महाप्रबंधक एस.एस. सिद्धार, महाप्रबंधक मनीष राय, सहायक महाप्रबंधक गीता कुमारी, सहायक महाप्रबंधक सीताराम महतो, करुणाकर महंता आदि ने संयुक्त रूप से मंगलदीप प्रज्वलित कर किया।

महाप्रबंधक अमित कुमार विश्वास ने स्वागत भाषण देते हुए अतिथियों, प्रतिभागियों, विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का स्वागत किया। उन्होंने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि विभिन्न वर्गों की व्यापक भागीदारी ने आयोजन को सार्थक बनाया।

बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने लूटी महफिल

नन्हे कलाकारों ने गीत-नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां

समारोह का सबसे जीवंत और आकर्षक हिस्सा विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। सबिता मेमोरियल स्कूल, लिटिल एंजेल पब्लिक स्कूल, सन लाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल, प्रोजेक्ट सेंट्रल स्कूल और केंद्रीय विद्यालय के बच्चों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

नन्हे कलाकारों ने गीत, नृत्य, समूह प्रस्तुति और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिकता की झलक दिखाई दी।

रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों के मंच पर आते ही सामुदायिक भवन तालियों से गूंज उठता। किसी प्रस्तुति में बच्चों की लय और ताल ने दर्शकों को आकर्षित किया तो किसी प्रस्तुति में उनकी भाव-भंगिमा और आत्मविश्वास ने खूब वाहवाही बटोरी। प्रस्तुति समाप्त होते ही सभागार में गूंजती तालियां नन्हे कलाकारों के उत्साह को और बढ़ाती रहीं।

विद्यालयों के शिक्षकों और अभिभावकों में भी बच्चों की प्रस्तुतियों को लेकर खासा उत्साह देखा गया। बच्चों ने यह साबित किया कि मंच यदि मिले तो प्रतिभा अपनी पहचान स्वयं बना लेती है।

आयोजन समिति ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में सहायक महाप्रबंधक गीता कुमारी, करुणाकर महंता, कुमारी अनीता, जगन्नाथ दास, कुंदन कुमार, नमित मिश्रा, भावतोष राउत, लक्ष्मी कुमारी, विजय गुप्ता और जॉन पूर्ति सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय योगदान दिया।

प्रतियोगिताओं के आयोजन से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी, प्रतिभागियों की भागीदारी और पुरस्कार वितरण तक समिति के सदस्यों ने समन्वय के साथ जिम्मेदारी निभाई।

भाषा के साथ प्रतिभा और संस्कृति का भी मंच बना समारोह

हिंदी पखवाड़े का यह समापन समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम बनकर नहीं रहा। एक ही मंच पर सेल अधिकारी, कर्मचारी, ठेका श्रमिक, महिलाएं और विद्यालयों के बच्चे जुटे। प्रतियोगिताओं ने जहां हिंदी में रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर दिया, वहीं बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया।

समारोह से यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि हिंदी को मजबूत करने के लिए केवल सरकारी आदेश या औपचारिक आयोजन पर्याप्त नहीं हैं। भाषा का विस्तार तभी होगा, जब वह कार्यालय से निकलकर समाज, परिवार, विद्यालय और रोजमर्रा के व्यवहार तक पहुंचे।

किरीबुरू के सामुदायिक भवन में आयोजित हिंदी पखवाड़ा का यह समापन समारोह इसी सामूहिक भागीदारी और हिंदी को अधिक व्यापक स्तर पर व्यवहार में लाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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