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अध्यक्ष स्वाती शिरपुरकर के नेतृत्व में महिला समिति किरीबुरू की सराहनीय पहल, करमपदा के 80 परिवारों को मिली निःशुल्क मच्छरदानी

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मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए ग्रामीणों को किया जागरूक, स्वच्छता और सतर्कता का दिया संदेश

महिलाओं की आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर भी हुई चर्चा

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू। ग्रामीण परिवारों को मच्छरजनित बीमारियों से बचाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महिला समिति किरीबुरू ने अध्यक्ष श्रीमती स्वाती शिरपुरकर के नेतृत्व में एक सराहनीय पहल की। समिति की ओर से करमपदा गांव में निःशुल्क मच्छरदानी वितरण एवं स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान के तहत गांव के 80 परिवारों के बीच मच्छरदानियों का वितरण किया गया। साथ ही ग्रामीणों को मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

अभियान के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। महिला समिति ने स्थानीय महिलाओं से संवाद कर उनकी वर्तमान आजीविका गतिविधियों को समझने तथा उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संभावित योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।

स्वाती शिरपुरकर के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण पर जोर

महिला समिति किरीबुरू की अध्यक्ष स्वाती शिरपुरकर के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान ने सामाजिक सरोकारों के प्रति समिति की प्रतिबद्धता को सामने रखा। कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता के साथ महिलाओं की जरूरतों को समझने और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया गया।

अभियान का संदेश स्पष्ट रहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भी जरूरी हैं। जब परिवारों को बीमारियों से बचाव की जानकारी और महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर मिलेंगे, तभी समुदाय के समग्र विकास को मजबूती मिलेगी।

80 परिवारों को निःशुल्क मच्छरदानी वितरित

महिला समिति की ओर से करमपदा गांव के 80 परिवारों को निःशुल्क मच्छरदानी उपलब्ध कराई गई। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए एक उपयोगी साधन उपलब्ध कराना और मच्छरदानी के नियमित इस्तेमाल के प्रति प्रेरित करना था।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि मच्छरजनित बीमारियों से बचने के लिए सावधानी, साफ-सफाई और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव की दी जानकारी

जागरूकता अभियान में ग्रामीणों को मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारणों तथा उनसे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। लोगों को सोते समय मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।

ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए जमा पानी की नियमित सफाई आवश्यक है। बुखार या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच और उपचार कराने की सलाह दी गई।

ग्रामीण महिलाओं से संवाद, आजीविका की स्थिति को समझा

अभियान के दौरान अध्यक्ष स्वाती शिरपुरकर सहित महिला समिति की सदस्यों ने करमपदा गांव की महिलाओं से बातचीत कर उनकी आजीविका, रोजगार गतिविधियों और आर्थिक चुनौतियों के बारे में जानकारी ली।

समिति की सदस्यों ने यह जानने का प्रयास किया कि स्थानीय महिलाएं वर्तमान में किन-किन कार्यों से जुड़ी हैं, उन्हें आजीविका चलाने में किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उनकी आय बढ़ाने के लिए किन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

महिलाओं के साथ ऐसे कार्यों और स्वरोजगार के अवसरों पर भी चर्चा की गई, जिनके माध्यम से वे अपनी आमदनी बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।

स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की संभावनाओं पर चर्चा

महिला समिति ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आजीविका गतिविधियां शुरू करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में यह जानने पर जोर रहा कि महिलाओं को किस प्रकार की सहायता और प्रशिक्षण की आवश्यकता है तथा उन्हें आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए कौन-सी योजनाएं उपयोगी हो सकती हैं।

स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी इस लिहाज से महत्वपूर्ण रही। ऐसे समूह महिलाओं को सामूहिक रूप से काम करने, स्वरोजगार के अवसर तलाशने और अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। कार्यक्रम में महिलाओं की रुचि और क्षमता के अनुरूप भविष्य में आजीविका संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

अध्यक्ष स्वाती शिरपुरकर का सकारात्मक संदेश

इस अभियान के माध्यम से महिला समिति किरीबुरू की अध्यक्ष स्वाती शिरपुरकर ने यह संदेश दिया कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल सहायता सामग्री वितरित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों को जागरूक करने, उनकी समस्याओं को समझने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास भी जरूरी है।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, स्वच्छ वातावरण और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता—समाज के बेहतर भविष्य के लिए ये तीनों महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीण महिलाओं की जरूरतों को समझकर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में प्रयास करना महिला सशक्तीकरण को वास्तविक आधार दे सकता है। उन्होंने कहा कि महिला समिति आगे भी सारंडा के दूर दराज के गांव में जाकर वहां रहने वाली महिलाओं के सहायतार्थ निरंतर कार्य जारी रखेगी।

अभियान में स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आजीविका के मुद्दों को शामिल करना इसी व्यापक सामाजिक सोच को दर्शाता है।

जनप्रतिनिधियों, सीएसआर प्रतिनिधि और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी

कार्यक्रम में महिला समिति किरीबुरू की अध्यक्ष श्रीमती स्वाती शिरपुरकर के अलावा श्रीमती रंजू शाह, श्रीमती लक्ष्मी सिदार, श्रीमती नलिनी बिस्वाल और श्रीमती रीना बिस्वाल उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर मेघाहातुबुरु नॉर्थ की मुखिया लिपि मुंडा, करमपदा के मुंडा राहुल नायक और बिरसिंह मुंडा, सेल किरीबुरू लौह अयस्क खदान (KIOM) के सीएसआर विभाग से प्रदीप कुमार चातर भी शामिल हुए।

इसके अलावा आंगनबाड़ी सेविका कुंती लागुरी, जूली तोरकोड, संकरी सिद्दू तथा विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

स्वास्थ्य जागरूकता से लेकर महिला सशक्तीकरण तक, एक सार्थक पहल

महिला समिति किरीबुरू की यह पहल ग्रामीण समुदाय में स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ महिलाओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाशने की दिशा में भी महत्वपूर्ण रही। एक ओर 80 परिवारों को मच्छरदानी उपलब्ध कराई गई, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और स्वरोजगार से जुड़े मुद्दों को समझने का प्रयास किया गया।

अध्यक्ष स्वाती शिरपुरकर के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान ने यह संदेश दिया कि सामाजिक विकास के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तीकरण को साथ लेकर चलना आवश्यक है। ऐसे प्रयास ग्रामीण परिवारों में जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं के लिए भविष्य में आजीविका के बेहतर अवसर तलाशने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

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