सेल मेघाहातुबुरु की पहल से खिलाड़ियों ने पहली बार बीजू पटनायक हॉकी स्टेडियम के स्ट्रॉ टर्फ मैदान पर लिया खेलने का अनुभव
12 बालिका खिलाड़ियों सहित 38 प्रतिभाओं की एक्सपोजर विजिट; सीजीएम संजय कुमार सिंह का लक्ष्य—सारंडा की प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं देकर हॉकी में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु । सारंडा के जंगलों और लौह अयस्क की खदानों के बीच हॉकी के सपने संजो रहे युवा खिलाड़ियों के लिए एक यादगार अवसर तब आया, जब सेल, मेघाहातुबुरु खदान प्रबंधन द्वारा संचालित सेल डे-बोर्डिंग हॉकी ट्रेनिंग सेंटर के 38 खिलाड़ियों ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी स्टेडियम में बने आधुनिक स्ट्रॉ टर्फ मैदान का अनुभव प्राप्त किया। इनमें 12 बालिका खिलाड़ी भी शामिल थीं। इन खिलाड़ियों ने ओडिशा के राउरकेला स्थित बीजू पटनायक हॉकी स्टेडियम का दौरा कर आधुनिक हॉकी मैदान को नजदीक से देखा और उस पर खेलने का अवसर पाया।
सेल मेघाहातुबुरु प्रबंधन की इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों को आधुनिक हॉकी की सुविधाओं से परिचित कराना, उनके खेल के प्रति आत्मविश्वास को बढ़ाना और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना था। सारंडा क्षेत्र के विभिन्न गांवों तथा किरीबुरू और मेघाहातुबुरु के शहरी इलाकों से आने वाले इन खिलाड़ियों के लिए यह यात्रा केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि अपने खेल संबंधी सपनों को नई दिशा देने वाला अनुभव साबित हुई।

सीजीएम संजय कुमार सिंह के निर्देश पर विशेष पहल
सेल मेघाहातुबुरु के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) संजय कुमार सिंह के निर्देशानुसार आयोजित इस एक्सपोजर विजिट को महाप्रबंधक योगेश प्रसाद राम, महाप्रबंधक सुरेश लकड़ा और सहायक महाप्रबंधक मृत्युंजय कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न कराया गया।
खिलाड़ियों के साथ हेड कोच जगदीप महाराणा, टीम मैनेजर सरगिया अंगारिया, असिस्टेंट कोच इल्यास भेंगरा, अलबीना और जैकब मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में राउरकेला स्थित आरएसपी की सेल हॉकी एकेडमी के हेड कोच राजू कांत सैनी का भी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन मिला।
सेल मेघाहातुबुरु प्रबंधन ने खिलाड़ियों के आने-जाने और भोजन सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की, ताकि खिलाड़ी बिना किसी परेशानी के इस विशेष अनुभव का लाभ उठा सकें।
पहली बार स्ट्रॉ टर्फ पर खेलने का रोमांच
सेल डे-बोर्डिंग हॉकी ट्रेनिंग सेंटर के इन खिलाड़ियों के लिए बीजू पटनायक हॉकी स्टेडियम का दौरा कई मायनों में खास रहा। अब तक ये खिलाड़ी मुख्य रूप से लौह चूर्ण और पत्थरों से भरे सामान्य मैदानों पर अभ्यास करते रहे हैं। ऐसे मैदानों पर सीमित संसाधनों के बीच प्रशिक्षण लेकर हॉकी में आगे बढ़ने का सपना देखना इनके संघर्ष और समर्पण को दर्शाता है।
आधुनिक स्ट्रॉ टर्फ मैदान पर पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को हॉकी खेलने की एक बिल्कुल अलग परिस्थिति का अनुभव हुआ। मैदान की सतह, गेंद की गति, खिलाड़ियों की चाल और खेल के दौरान तालमेल की बारीकियों को समझने का उन्हें अवसर मिला।
पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाले मैदान पर खेलने से खिलाड़ी काफी प्रभावित हुए। उनके लिए यह अनुभव इस बात को समझने का अवसर भी था कि उच्चस्तरीय हॉकी में बेहतर तकनीक, तेज गति, सटीक पासिंग और नियमित अभ्यास की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

सारंडा की प्रतिभाओं को मिला बड़ा सपना देखने का अवसर
सारंडा क्षेत्र में हॉकी केवल एक खेल नहीं, बल्कि अनेक ग्रामीण युवाओं के लिए अपनी पहचान बनाने का माध्यम भी है। सीमित संसाधनों और सामान्य खेल मैदानों के बावजूद यहां के बच्चे और युवा नियमित अभ्यास के जरिए अपनी प्रतिभा को निखारने में जुटे हैं।
सेल डे-बोर्डिंग हॉकी ट्रेनिंग सेंटर ऐसे ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने का काम कर रहा है। इनमें बालक और बालिकाएं दोनों शामिल हैं। इस एक्सपोजर विजिट ने खिलाड़ियों को यह समझने का अवसर दिया कि यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिले, तो वे भी ऊंचे स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
विशेष रूप से 12 बालिका खिलाड़ियों की भागीदारी इस पहल को और महत्वपूर्ण बनाती है। खेल के क्षेत्र में लड़कियों को समान अवसर और प्रोत्साहन देना ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए आवश्यक है।
खिलाड़ियों ने अनुभव को बताया प्रेरणादायक
स्ट्रॉ टर्फ मैदान पर खेलने का अनुभव खिलाड़ियों के लिए उत्साहवर्धक रहा। जिन मैदानों पर वे रोजाना अभ्यास करते हैं, उनकी तुलना में आधुनिक हॉकी स्टेडियम की सुविधाएं उनके लिए बिल्कुल नई थीं।
खिलाड़ियों को न केवल मैदान पर खेलने का अवसर मिला, बल्कि आधुनिक हॉकी की परिस्थितियों को करीब से देखने और अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए नई बातें सीखने का मौका भी मिला। इस तरह की एक्सपोजर विजिट से खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ने, खेल के प्रति गंभीरता विकसित होने और भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।
यह अनुभव उनके लिए एक प्रेरणा है कि वर्तमान परिस्थितियां चाहे जैसी हों, नियमित मेहनत, अनुशासन और उचित मार्गदर्शन के सहारे आगे बढ़ने की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं।
सीजीएम संजय कुमार सिंह का संदेश: प्रतिभाओं को अवसर देना जरूरी
सेल मेघाहातुबुरु के सीजीएम संजय कुमार सिंह के निर्देश पर आयोजित इस पहल से प्रबंधन की ओर से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर खेल अनुभव उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
इस अवसर का संदेश स्पष्ट है कि ग्रामीण और खनन क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल नियमित अभ्यास ही नहीं, बल्कि आधुनिक खेल सुविधाओं से परिचय, अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और बड़े स्तर के खेल वातावरण का अनुभव भी जरूरी है।
सारंडा के खिलाड़ियों को स्ट्रॉ टर्फ मैदान तक पहुंचाने की यह पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे खिलाड़ियों को अपने खेल की मौजूदा स्थिति समझने, तकनीकी कमियों को पहचानने और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा लेने का अवसर मिला।
हालांकि, सीजीएम संजय कुमार सिंह का कोई अलग से सत्यापित प्रत्यक्ष उद्धरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनके नाम से किसी विशेष बयान को उद्धृत करने के बजाय इस पहल के उद्देश्य और संदेश को प्रस्तुत किया गया है।

ज्योति प्रकाश मिश्रा का मिला विशेष सहयोग
राउरकेला स्थित बीजू पटनायक हॉकी स्टेडियम के आधुनिक स्ट्रॉ टर्फ मैदान पर सारंडा के 38 युवा खिलाड़ियों को खेलने का अवसर उपलब्ध कराने में ज्योति प्रकाश मिश्रा, जीएम एचआर, स्पोर्ट्स, आरएसपी, राउरकेला का विशेष सहयोग रहा। उनके सहयोग से लौह चूर्ण और पत्थरों वाले मैदानों पर अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को आधुनिक हॉकी मैदान का अनुभव मिला। यह पहल खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें बेहतर खेल प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण साबित हुई।
खेल विकास की दिशा में सेल प्रबंधन की पहल
सेल मेघाहातुबुरु खदान प्रबंधन द्वारा संचालित डे-बोर्डिंग हॉकी ट्रेनिंग सेंटर स्थानीय युवाओं को खेल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस तरह की एक्सपोजर विजिट खिलाड़ियों को उनके परिचित मैदानों से बाहर निकलकर बड़े खेल मंचों को समझने का अवसर देती है।
यदि इस पहल को नियमित प्रशिक्षण, समय-समय पर स्ट्रॉ टर्फ पर अभ्यास, तकनीकी प्रशिक्षण शिविर और प्रतियोगिताओं में भागीदारी जैसे अवसरों से जोड़ा जाए, तो खिलाड़ियों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
सारंडा की धरती पर हॉकी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत है उन्हें उचित मंच, संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन देने की। बीजू पटनायक हॉकी स्टेडियम का यह दौरा 38 युवा खिलाड़ियों के लिए इसी दिशा में एक यादगार कदम रहा।
लौह चूर्ण और पत्थरों से भरे मैदानों पर अभ्यास करने वाले इन खिलाड़ियों ने अब आधुनिक हॉकी मैदान का अनुभव हासिल किया है। उम्मीद है कि यह अनुभव उनके भीतर नए सपने, बेहतर प्रदर्शन का संकल्प और हॉकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास पैदा करेगा।










