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मनोहरपुर थाना प्रभारी पर गंभीर आरोपों का विस्फोट, पूर्व SPO गणेश सिंह ने रांची में खोला मोर्चा

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मुख्यमंत्री सचिवालय, DGP और CID के ADG कार्यालय तक पहुंचा मामला, उच्चस्तरीय जांच और 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा की मांग

दुष्कर्म, पॉक्सो, ब्राउन शुगर तस्करी और अवैध वसूली के सिंडिकेट में संलिप्तता के आरोप; कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे गणेश सिंह

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थाना क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोपों का मामला अब राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गया है। मनोहरपुर थाना में करीब 15 से 20 वर्षों तक सेवा देने का दावा करने वाले पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) गणेश सिंह ने थाना प्रभारी सब-इंस्पेक्टर एमुयेल (अमीमूल/एनूवाल) एक्का के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय, पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय और अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) कार्यालय में लिखित परिवाद पत्र सौंपा है।

गणेश सिंह ने थाना प्रभारी पर कथित अवैध सिंडिकेट चलाने, गंभीर आपराधिक मामलों में सौदेबाजी करने, नशीले पदार्थों के कारोबार को संरक्षण देने और अवैध वसूली जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन कथित गतिविधियों का विरोध करने के कारण उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी जान-माल को खतरा है।

हालांकि, ये आरोप गणेश सिंह की शिकायत और उनके बयानों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

तीन शीर्ष कार्यालयों में परिवाद, निष्पक्ष जांच की मांग

गणेश सिंह के अनुसार, उन्होंने रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री सचिवालय, DGP कार्यालय और CID के ADG कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपना परिवाद पत्र जमा कराया है। उनका कहना है कि मनोहरपुर थाना क्षेत्र में कथित अवैध गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय मिलने की उम्मीद के अनुरूप ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आग्रह है कि मामले की जांच स्थानीय थाना व्यवस्था से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए, ताकि आरोपों की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में सौदेबाजी का गंभीर आरोप

गणेश सिंह ने अपने परिवाद में आरोप लगाया है कि दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में विधिसम्मत कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से सौदेबाजी की जाती है। उन्होंने साक्ष्यों को प्रभावित करने और मिटाने के प्रयासों का भी आरोप लगाया है।

ये आरोप बेहद गंभीर हैं, क्योंकि दुष्कर्म और बच्चों के यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ितों की सुरक्षा, साक्ष्यों का संरक्षण और निष्पक्ष जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। गणेश सिंह ने मांग की है कि संबंधित मामलों के अभिलेखों, जांच की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

निजी बैंक खाते में कथित अवैध वसूली की रकम मंगाने का दावा

पूर्व SPO ने आरोप लगाया है कि बालू कारोबारियों और अन्य कथित माफियाओं से अवैध वसूली की रकम उनके निजी बैंक खाते में ऑनलाइन मंगवाई जाती थी और बाद में नकद निकासी कराई जाती थी। उनका दावा है कि इस लेन-देन से संबंधित बैंक स्टेटमेंट उनके पास मौजूद है।

यदि शिकायत में बताए गए बैंक लेन-देन और उनके पीछे की परिस्थितियों की पुष्टि होती है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। इस मामले में बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन के लाभार्थियों और धनराशि के वास्तविक स्रोत की जांच से आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सकता है।

गणेश सिंह ने संबंधित बैंक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।

ब्राउन शुगर तस्करी में नाबालिगों के इस्तेमाल का आरोप

गणेश सिंह ने मनोहरपुर और आसपास के क्षेत्रों में ब्राउन शुगर सहित अन्य नशीले पदार्थों के कथित कारोबार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि नाबालिग बच्चों के माध्यम से नशीले पदार्थों की बिक्री कराई जाती है और पकड़े गए कथित तस्करों को रिश्वत लेकर छोड़ने जैसी गतिविधियां होती हैं।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल अवैध नशा कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के शोषण और उनके भविष्य से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करेगा। गणेश सिंह ने नशे के कथित नेटवर्क, उसके संचालकों और संबंधित मामलों में हुई कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

बालू, जुआ, रेलवे स्क्रैप और चोरी की गाड़ियों को लेकर भी सवाल

परिवाद में गणेश सिंह ने ढीपा क्षेत्र में बालू जब्ती के दौरान कथित फर्जीवाड़े, रेलवे स्क्रैप के अवैध कारोबार, चोरी की गाड़ियों के कटान और खुलेआम जुआ संचालित होने जैसे आरोप भी लगाए हैं।

उनका दावा है कि इन गतिविधियों की निष्पक्ष जांच से कथित अवैध नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। उन्होंने प्रशासन से संबंधित जब्ती अभिलेखों, मामलों की केस डायरी, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।

इन आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी।

जान का खतरा बताकर 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा मांगी

गणेश सिंह का कहना है कि कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन्हें लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है, तो वे संबंधित घटनाओं और आरोपों के संबंध में उपलब्ध जानकारी तथा साक्ष्य जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार हैं। उन्होंने अपने बयान विधिसम्मत तरीके से दर्ज कराने की भी मांग की है।

CID या स्वतंत्र SIT से जांच कराने की मांग

पूर्व SPO ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए CID अथवा स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने की मांग की है। यह प्रावधान मजिस्ट्रेट द्वारा बयान और स्वीकारोक्ति दर्ज करने से संबंधित है।

उनका कहना है कि मामले में निष्पक्ष जांच के लिए सभी उपलब्ध दस्तावेजों, बैंकिंग लेन-देन, संबंधित आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

15 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत जाने की चेतावनी

गणेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि लगभग 15 दिनों के भीतर मामले में न्यायसंगत और ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती है, तो वे न्याय पाने के लिए सक्षम न्यायालय का रुख करेंगे। उन्होंने कोर्ट कंप्लेंट केस दाखिल करने सहित अपने उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने की बात कही है।

उनका कहना है कि वे मामले को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि चाहते हैं कि सक्षम एजेंसी जांच करे और कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

अब राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला प्रशासन की भूमिका पर निगाहें

मनोहरपुर थाना प्रभारी के खिलाफ पूर्व SPO द्वारा लगाए गए आरोपों ने पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब महत्वपूर्ण यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय, पुलिस मुख्यालय और CID इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं।

यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो उनकी विधिसम्मत जांच कर सच्चाई सामने लाना आवश्यक है। वहीं, आरोपित अधिकारी का पक्ष सामने आना और जांच पूरी होने तक सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखना भी न्यायसंगत प्रक्रिया का हिस्सा है।

फिलहाल, गणेश सिंह ने शीर्ष स्तर पर शिकायत देकर निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और न्याय की मांग की है। अब देखना होगा कि राज्य के संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

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