बाल विवाह, बाल शोषण और साइबर अपराध से बचाव के बताए तरीके, मुसीबत में मदद के लिए हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
रिपोर्ट शैलेश सिंह
नोवामुंडी, 31 अक्टूबर। माननीय सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के निर्देशानुसार पश्चिमी सिंहभूम जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की ओर से शनिवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नोवामुंडी में ‘सुरक्षित बचपन’ अभियान के तहत विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष श्री मोहम्मद शाकिर एवं डालसा सचिव श्री रवि चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बाल अधिकार, बाल विवाह, बाल शोषण, साइबर अपराध और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘बोलो, बताओ, बचो’, ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’ और ‘जागरूक बचपन, सुरक्षित बचपन’ जैसे विषयों के माध्यम से बच्चों को जागरूक किया गया।

पोक्सो कानून और बाल विवाह के दुष्परिणाम बताए
प्राधिकार की अधिकार मित्र (पैरा लीगल वॉलंटियर) PLV विनीता सान्डिल ने छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम-2012 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को लैंगिक अपराधों एवं यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों और बाल शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने बताया कि जिले के सभी चिन्हित विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी देने के साथ उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न और अपराध के विरुद्ध जागरूक एवं सजग बनाना है।

मुसीबत में ये हेल्पलाइन नंबर आएंगे काम
कार्यक्रम में छात्राओं को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई।
- 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन, बच्चों की सहायता के लिए 24 घंटे उपलब्ध।
- 1930 – साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत।
- 112 – पुलिस एवं आपातकालीन सहायता।
- 108 – एंबुलेंस सेवा।
विनीता सान्डिल ने बताया कि किसी बच्चे के साथ परेशानी, शोषण या उत्पीड़न की स्थिति उत्पन्न होने पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है। वहीं, साइबर ठगी होने पर 1930 और आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए 112 पर सूचना दी जा सकती है।

मुफ्त कानूनी सहायता का भी प्रावधान
छात्राओं को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) एवं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा बच्चों के लिए निःशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान है, जिसके माध्यम से वे कानूनी मदद प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और किसी भी तरह के शोषण, बाल विवाह अथवा साइबर अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति और संबंधित हेल्पलाइन से तत्काल मदद लेनी चाहिए। जागरूकता और सही समय पर उठाया गया कदम ही सुरक्षित बचपन की मजबूत नींव है।











