तितलीघाट और झाड़बेड़ा के बीच गूंजा जोरदार धमाका, चालक और यात्री बाल-बाल बचे; सड़क की खामियां फिर बनीं दुर्घटना की वजह
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू-छोटानागरा मुख्य सड़क मार्ग पर एक बार फिर बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत तितलीघाट और झाड़बेड़ा गांव के बीच सारंडा घाटी में एक यात्री बस और मोबिल समेत अन्य तरल पदार्थों से लदी पिकअप वाहन के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि टक्कर की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों वाहनों के चालक और उसमें सवार लोग बाल-बाल बच गए।
इस दुर्घटना में दोनों वाहनों को भारी क्षति पहुंची है। टक्कर के बाद यात्री बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि पिकअप वाहन भी गंभीर रूप से टूट गया।

घटनास्थल पर अफरा-तफरी, पुलिस ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद घटनास्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की मदद से स्थिति को संभाला गया। सूचना मिलते ही छोटानागरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त बस को अपने कब्जे में लेकर थाना ले गई। वहीं पिकअप वाहन अब भी घटनास्थल पर ही खड़ा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों वाहन घाटी के खतरनाक मोड़ पर तेज रफ्तार में थे और अचानक आमने-सामने आ गए, जिससे चालक संभल नहीं सके।

सारंडा घाटी: दुर्घटनाओं का बनता जा रहा हॉटस्पॉट
किरीबुरू-छोटानागरा मार्ग पर यह कोई पहली घटना नहीं है। सारंडा घाटी का यह इलाका लगातार दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। खासकर तितलीघाट और सैडल गेट के बीच का हिस्सा बेहद संवेदनशील माना जाता है।
इस सड़क की सबसे बड़ी समस्या इसका संकीर्ण होना और कई अंधे मोड़ों का होना है। इन मोड़ों पर सामने से आने वाले वाहन का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
तेज रफ्तार और लापरवाही बन रही जानलेवा
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटी क्षेत्र में वाहन चालक अक्सर तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं और मोड़ों पर हॉर्न का इस्तेमाल भी नहीं करते। यही लापरवाही कई बार बड़े हादसों को जन्म देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी और घाटी वाले रास्तों में सतर्कता सबसे जरूरी होती है, लेकिन यहां अक्सर यातायात नियमों की अनदेखी की जाती है।

स्थानीय लोगों ने उठाई सुरक्षा उपायों की मांग
लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, खतरनाक मोड़ों को चौड़ा किया जाए और नियमित पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस सड़क की खामियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह घटना एक बार फिर प्रशासन और वाहन चालकों के लिए चेतावनी बनकर सामने आई है कि सारंडा घाटी की सड़कें जरा सी लापरवाही को माफ नहीं करतीं।














