प्रबंधन ने मानी गलती, भविष्य में यूनियनों से विचार-विमर्श के बाद ही जारी होगा छुट्टियों का सर्कुलर; दिवाली गिफ्ट देने का भी आश्वासन
रिपोर्ट शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। सेल की मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में मजदूरों की एकजुटता और सभी श्रमिक यूनियनों के संयुक्त विरोध के आगे आखिरकार प्रबंधन को झुकना पड़ा। फेस्टिवल हॉलिडे को लेकर प्रबंधन के अचानक बदले गए आदेश के विरोध में शुक्रवार को मजदूरों ने खदान का चक्का जाम कर दिया। दोपहर 1 बजे से शुरू हुआ आंदोलन शाम लगभग 3:30 बजे समाप्त हुआ। इस दौरान खदान का पूरा कामकाज करीब ढाई घंटे तक ठप रहा।
आंदोलन के समाप्त होने पर प्रबंधन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सेल कर्मियों को आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह का एकतरफा निर्णय नहीं लिया जाएगा। किसी भी त्योहार की छुट्टी की तिथि निर्धारित करने से पहले सभी श्रमिक संगठनों के साथ बैठक कर सहमति बनाई जाएगी। इसके साथ ही प्रबंधन ने सेल कर्मियों को दिवाली गिफ्ट देने का भी आश्वासन दिया।

छुट्टी के आदेश में अचानक बदलाव बना विवाद की वजह
मजदूर यूनियनों के अनुसार, सेल कर्मियों को स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत होली, विजयादशमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली के चार फेस्टिवल हॉलिडे मिलते हैं। इन त्योहारों पर ड्यूटी करने की स्थिति में कर्मचारियों को नियमानुसार अतिरिक्त छुट्टी का लाभ मिलता है।
परंपरा के अनुसार, इन त्योहारों की छुट्टियों की तिथि में एक-दो दिन का बदलाव करने के लिए प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच विचार-विमर्श किया जाता है। इसके बाद सर्वसम्मति से सर्कुलर जारी होता रहा है।
दो दिन में दो सर्कुलर, प्रबंधन के फैसले पर उठे सवाल
विवाद की शुरुआत 4 नवंबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश संख्या MIOM/HR/2026/2937 से हुई। इस आदेश में 8 नवंबर को रविवार होने के कारण फेस्टिवल हॉलिडे की छुट्टी 9 नवंबर 2026, सोमवार को निर्धारित की गई थी।
लेकिन इसके अगले ही दिन 5 नवंबर को प्रबंधन ने संशोधित सर्कुलर संख्या MIOM/HR/2026/2947 जारी कर छुट्टी की तारीख बदलते हुए 11 नवंबर 2026 निर्धारित कर दी।
मजदूर संगठनों की नाराजगी इसी एकतरफा बदलाव को लेकर थी। यूनियनों का कहना था कि जब पहले से जारी आदेश के अनुसार छुट्टी निर्धारित हो चुकी थी, तो सभी श्रमिक संगठनों से बातचीत किए बिना उसे अचानक बदलना कर्मचारियों के हितों और स्थापित परंपरा के विपरीत है।

एकजुट हुए सभी यूनियन, ढाई घंटे ठप रही खदान
प्रबंधन के इस फैसले के विरोध में सभी श्रमिक यूनियन एक मंच पर आ गईं। संयुक्त रूप से चक्का जाम कर मजदूरों ने स्पष्ट संदेश दिया कि कर्मचारियों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले उनकी यूनियनों को विश्वास में लिए बिना स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
आंदोलन में मजदूर नेता अफताब आलम, अमित झा, गुंजन कुमार, दीपक राम, इलियास चंपिया, इंतखाब आलम, संतोष पंडा, जगन्नाथ चतर, धनुर्जय लागुरी, अनिल टोपनो, धनीराम लकड़ा, राज नारायण शर्मा और कुलदीप सिंह सहित खदान के बड़ी संख्या में मजदूर शामिल हुए।
आश्वासन के साथ आंदोलन समाप्त, लेकिन कर्मियों का नुकसान कौन भरेगा?
प्रबंधन के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त तो हो गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सेल कर्मियों के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है। छुट्टी के आदेश में अचानक बदलाव और उसके विरोध में हुए चक्का जाम का सीधा खामियाजा आखिरकार कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ा।
विशेषकर रविवार को ड्यूटी करने वाले सेल कर्मियों के लिए एक दिन की हाजिरी और उसके बदले मिलने वाली अतिरिक्त छुट्टी का महत्व था। ऐसे में आदेशों में असमंजस और प्रबंधन के एकतरफा फैसले से कर्मचारियों के हित प्रभावित हुए।
मजदूरों की मांग स्पष्ट है कि सेल में कर्मचारियों से जुड़े नियमों और सुविधाओं पर निर्णय पारदर्शी तरीके से हो। प्रबंधन को चाहिए कि भविष्य में ऐसे विवादों की नौबत ही न आए और यूनियनों से समय रहते बातचीत कर कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।









