सभी मजदूर यूनियन एकजुट, संयुक्त मोर्चा के बैनर तले दोपहर एक बजे से खदान बंद; 9 नवंबर की पूर्व घोषित छुट्टी बहाल करने की मांग पर अड़े श्रमिक
रिपोर्ट शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। सेल (SAIL) की मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में दिवाली की छुट्टी को लेकर प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। छुट्टी के आदेश में लगातार बदलाव से नाराज सभी मजदूर यूनियनों ने एकजुट होकर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शुक्रवार, 6 नवंबर को दोपहर एक बजे से खदान में चक्का जाम कर दिया। इसके साथ ही खदान का उत्पादन, माल ढुलाई और अन्य कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। श्रमिकों की एकसूत्री मांग है कि प्रबंधन 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को घोषित पूर्व निर्धारित दिवाली की छुट्टी को ही बहाल करे।
मजदूर संगठनों ने प्रबंधन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि श्रमिकों को मिलने वाली त्योहारों की छुट्टियों के मामले में भी प्रबंधन एकतरफा निर्णय थोपने पर आमादा है। जब स्टैंडिंग ऑर्डर के आधार पर वर्षों से त्योहारों की छुट्टियों का निर्धारण प्रबंधन और यूनियन के आपसी विचार-विमर्श से होता रहा है, तो इस बार श्रमिक संगठनों को विश्वास में लिए बिना छुट्टी की तारीख बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

स्टैंडिंग ऑर्डर में चार प्रमुख त्योहारों की छुट्टी का प्रावधान
मजदूर यूनियनों का कहना है कि स्टैंडिंग ऑर्डर के प्रावधान के तहत कर्मचारियों को चार प्रमुख त्योहारों पर विशेष फेस्टिवल हॉलिडे मिलता है। इनमें होली, विजयादशमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली शामिल हैं। इन त्योहारों पर ड्यूटी करने की स्थिति में कर्मचारियों को अतिरिक्त छुट्टी दिए जाने का प्रावधान है।
यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार, स्टैंडिंग ऑर्डर के आधार पर प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच आपसी बैठक एवं सहमति से त्योहारों की छुट्टियों की तारीख में एक दिन आगे-पीछे बदलाव कर सर्कुलर जारी किया जाता रहा है। इसी स्थापित प्रक्रिया के तहत इस वर्ष भी छुट्टी की तारीख निर्धारित की गई थी।
4 नवंबर को 9 नवंबर की छुट्टी का निकला था आदेश
मेघाहातुबुरु खदान के मानव संसाधन विभाग ने 4 नवंबर 2026 को कार्यालय आदेश संख्या MIOM/HR/2026/2937 जारी किया था। इसमें वर्ष 2026 के पूर्व निर्धारित अवकाश कैलेंडर में संशोधन करते हुए 8 नवंबर (रविवार) को पड़ने वाली दिवाली की छुट्टी को बदलकर 9 नवंबर (सोमवार) कर दिया गया था।
इस आदेश के बाद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली थी और अपने पारिवारिक एवं त्योहार संबंधी कार्यक्रम उसी के अनुसार निर्धारित करने शुरू कर दिए थे। लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक कायम नहीं रही।
24 घंटे के भीतर दूसरा आदेश, 11 नवंबर को कर दी छुट्टी!
पहले आदेश के अगले ही दिन, 5 नवंबर 2026 को प्रबंधन ने नया कार्यालय आदेश संख्या MIOM/HR/2026/2947 जारी कर दिया। इस नए आदेश में पूर्व के आदेश संख्या MIOM/HR/2026/2937 को निरस्त करते हुए दिवाली की छुट्टी के स्थान पर 11 नवंबर (बुधवार) को भाई दूज की छुट्टी घोषित कर दी गई।
यही फैसला श्रमिकों के आक्रोश की वजह बन गया। मजदूर यूनियनों का आरोप है कि बोकारो से आए निर्देश अथवा फरमान के आधार पर स्थानीय स्तर पर पहले से जारी आदेश को पलट दिया गया। यूनियन का सवाल है कि जब 4 नवंबर को स्टैंडिंग ऑर्डर के आधार पर 9 नवंबर की छुट्टी घोषित की गई थी, तो अगले ही दिन उसे बदलने का आधार क्या था? क्या स्थानीय प्रबंधन को श्रमिक संगठनों की सहमति और स्थापित प्रक्रिया का सम्मान नहीं करना चाहिए था?
सभी यूनियनों ने एकजुट होकर किया चक्का जाम
लगातार दो आदेश जारी होने और छुट्टी की तारीख बदलने से नाराज मजदूर संगठनों ने संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया। शुक्रवार दोपहर एक बजे सभी यूनियनों के प्रतिनिधियों और श्रमिकों ने एकजुट होकर मेघाहातुबुरु खदान का चक्का जाम कर दिया।
आंदोलन के कारण खदान का उत्पादन और माल ढुलाई पूरी तरह बंद हो गई। श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय होने तक प्रबंधन के खिलाफ विरोध जारी रहेगा।
मजदूर नेताओं ने संभाली आंदोलन की कमान
इस आंदोलन में मजदूर नेताओं अफताब आलम, अमित झा, गुंजन कुमार, दीपक राम, इलियास चंपिया, इंतखाब आलम, संतोष पंडा, जगन्नाथ चातर, धनुर्जय लागुरी, अनिल टोपनो, धनीराम लकड़ा, राज नारायण शर्मा और कुलदीप सिंह सहित अन्य श्रमिक प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका रही।
सभी यूनियनों के एक मंच पर आने से प्रबंधन के सामने चुनौती और गंभीर हो गई है। श्रमिकों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक दिन की छुट्टी की नहीं, बल्कि स्टैंडिंग ऑर्डर में मिले अधिकारों, श्रमिक संगठनों के सम्मान और प्रबंधन की एकतरफा कार्यशैली के खिलाफ है।
छुट्टी का विवाद बना प्रबंधन और श्रमिकों के बीच टकराव की वजह
मजदूर संगठनों का कहना है कि किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान में बेहतर उत्पादन और उत्पादकता के लिए प्रबंधन एवं श्रमिकों के बीच विश्वास और आपसी तालमेल बेहद जरूरी है। लेकिन यदि प्रबंधन बिना बातचीत के आदेश जारी करेगा और पहले से घोषित सुविधाओं एवं छुट्टियों में मनमाने तरीके से बदलाव करेगा, तो श्रमिकों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
यूनियनों ने सवाल उठाया है कि क्या सेल प्रबंधन के लिए श्रमिकों की भावनाओं, त्योहारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों का कोई महत्व नहीं है? क्या स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत चली आ रही व्यवस्था को एकतरफा आदेश से बदला जा सकता है?
फिलहाल मेघाहातुबुरु खदान में चक्का जाम के कारण उत्पादन एवं माल ढुलाई ठप है। अब निगाहें सेल प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह श्रमिकों की मांग पर क्या निर्णय लेता है।
श्रमिकों का स्पष्ट संदेश है कि 9 नवंबर की पूर्व घोषित दिवाली छुट्टी बहाल की जाए। सवाल अब केवल छुट्टी की तारीख का नहीं, बल्कि प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के अधिकारों और स्थापित औद्योगिक परंपराओं का सम्मान करने का भी है।









