मस्जिद प्रांगण में विशेष आयोजन, सम्मान के साथ दी गई दावत; सेवा और इंसानियत का दिया संदेश
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू। रबी अल-अव्वल के पवित्र अवसर पर किरीबुरू मस्जिद कमिटी की ओर से एक सराहनीय और सामाजिक संदेश देने वाली पहल की गई। मस्जिद कमिटी ने किरीबुरू और मेघाहातुबुरु शहर को स्वच्छ एवं साफ-सुथरा बनाए रखने में लगातार अपनी मेहनत और सेवा देने वाले लगभग 50 महिला एवं पुरुष ठेका सफाई श्रमिकों को मस्जिद प्रांगण में विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया।

मेहनत करने वाले हाथों को मिला सम्मान
कार्यक्रम के दौरान सफाईकर्मियों को सम्मान के साथ दावत दी गई। इस पहल के माध्यम से मस्जिद कमिटी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शहर की स्वच्छता में प्रतिदिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सफाईकर्मी भी समाज के सम्मानित और अभिन्न अंग हैं।
सुबह से लेकर दिनभर शहर की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में जुटे इन महिला-पुरुष श्रमिकों की मेहनत के कारण ही किरीबुरू और मेघाहातुबुरु को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है। ऐसे श्रमिकों को सम्मान देना न केवल सामाजिक जिम्मेदारी है, बल्कि उनकी मेहनत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी माध्यम है।
रबी अल-अव्वल: पैगंबर साहब की पैदाइश से जुड़ा पवित्र महीना
इस्लामी हिजरी कैलेंडर में रबी अल-अव्वल तीसरा महीना है। यह महीना पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश से जुड़ा होने के कारण दुनिया भर के मुसलमानों के लिए विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। व्यापक रूप से 12 रबी अल-अव्वल को पैगंबर साहब की पैदाइश की तारीख के रूप में याद किया जाता है, हालांकि इस तारीख को लेकर इस्लामी विद्वानों में अलग-अलग मत भी मिलते हैं।

570-571 ईस्वी में मक्का में पैदाइश
इस्लामी ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश मक्का में लगभग 570 या 571 ईस्वी में हुई थी। उनका जीवन इंसानियत, दया, न्याय, करुणा, सेवा और नैतिकता की शिक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
कब से मनाया जा रहा है रबी अल-अव्वल का आयोजन?
रबी अल-अव्वल स्वयं हिजरी कैलेंडर के आरंभ से चला आ रहा इस्लामी महीना है। वहीं पैगंबर साहब की पैदाइश की याद में सार्वजनिक रूप से मिलादुन्नबी/मौलिद मनाने की परंपरा बाद की सदियों में विभिन्न मुस्लिम समाजों और क्षेत्रों में विकसित हुई। अलग-अलग इस्लामी परंपराओं में इसे मनाने के तरीके और धार्मिक दृष्टिकोण में अंतर भी पाया जाता है।
सेवा और जरूरतमंदों की मदद से जुड़ा संदेश
रबी अल-अव्वल में पैगंबर साहब के जीवन और शिक्षाओं को याद करते हुए गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने की परंपरा को भी महत्व दिया जाता है। कई स्थानों पर इस अवसर पर भोजन वितरण, सदका और सामाजिक सेवा जैसे कार्य किए जाते हैं।
इसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए किरीबुरू मस्जिद कमिटी द्वारा शहर की स्वच्छता में योगदान देने वाले सफाई श्रमिकों को सम्मानित करना अपने आप में सामाजिक एकता, भाईचारे और इंसानियत का सुंदर संदेश देता है।
मजहब के साथ इंसानियत और भाईचारे का संदेश
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि रबी अल-अव्वल के धार्मिक अवसर को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे समाज के मेहनतकश वर्ग के सम्मान और सेवा से जोड़ा गया। इससे समाज में आपसी भाईचारा, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता का संदेश गया।

मस्जिद कमिटी के पदाधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर किरीबुरू मस्जिद कमिटी के सदर आलम अंसारी, सचिव अबरार अहमद, कोषाध्यक्ष शमीम सिद्धिकी, मौलाना मिन्हाज, नईम आलम, ऐनुल हक, नाजिर अहमद, मोहम्मद मिन्हाज, अब्दुल रफीक, जाकिर हुसैन, गुलाब, अनीस, मुस्ताक, शमशाद आलम समेत कमिटी के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
शहर को स्वच्छ रखने वालों के प्रति आभार
मस्जिद कमिटी की इस पहल से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि किसी भी शहर की खूबसूरती केवल बड़ी इमारतों और सड़कों से नहीं, बल्कि उन मेहनतकश हाथों से भी बनती है जो हर दिन शहर की गंदगी साफ कर उसे रहने योग्य और स्वच्छ बनाते हैं।
रबी अल-अव्वल के अवसर पर सफाईकर्मियों को सम्मान और दावत देकर किरीबुरू मस्जिद कमिटी ने धर्म, सेवा, सम्मान, भाईचारे और इंसानियत को एक साथ जोड़ने वाली मिसाल पेश की।














