मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना और सुदृढ़ीकरण योजना की राशि पड़ी रही, संवेदकों को नहीं मिला भुगतान
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने राज्य के अधिकांश कार्यपालक अभियंताओं को फटकार लगाते हुए मात्र दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि राशि उपलब्ध रहने के बावजूद संवेदकों (ठेकेदारों) को भुगतान नहीं किया जाना गंभीर प्रशासनिक उदासीनता का परिचायक है।

सरकारी खजाने में पैसा, लेकिन धरातल पर भुगतान ठप
ग्रामीण कार्य विभाग के उप सचिव विजय कुमार भगत द्वारा 4 जून 2026 को जारी पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत संवेदकों द्वारा जमा किए गए विपत्रों के आधार पर विभिन्न प्रमंडलों ने स्वयं राशि की अधियाचना भेजी थी। विभाग ने मांग के अनुरूप राशि भी आवंटित कर दी, लेकिन अधिकांश कार्यपालक अभियंताओं ने अब तक भुगतान की प्रक्रिया शुरू तक नहीं की।
सिर्फ चार प्रमंडलों ने किया खर्च, बाकी की कार्यशैली पर सवाल
ट्रेजरी एमआईएस की रिपोर्ट के अनुसार 4 जून 2026 तक केवल दुमका, पाकुड़, कोडरमा और रामगढ़ कार्य प्रमंडलों द्वारा ही आवंटित राशि का व्यय किया गया है। इसके अलावा राज्य के अन्य सभी संबंधित कार्य प्रमंडलों में योजनाओं के लिए उपलब्ध राशि खर्च नहीं की गई है। विभाग ने इस स्थिति को “खेदजनक” बताते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी शुरू कर दी है।
भुगतान में देरी से सड़क निर्माण कार्यों पर संकट
विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भुगतान नहीं होने से योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर संवेदकों को आर्थिक नुकसान और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। समय पर भुगतान नहीं होने से निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं के अधर में लटकने की आशंका भी बढ़ गई है।
दो दिन में मांगा स्पष्टीकरण, शीघ्र भुगतान का निर्देश
ग्रामीण कार्य विभाग ने संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया है कि राशि उपलब्ध रहने के बावजूद भुगतान नहीं किए जाने के कारणों का विस्तृत स्पष्टीकरण दो दिनों के भीतर विभाग को उपलब्ध कराया जाए। साथ ही लंबित भुगतानों को तत्काल निष्पादित कर उसकी रिपोर्ट भी विभाग को भेजने का आदेश दिया गया है।
अब अधिकारियों की जवाबदेही तय होने के संकेत
विभागीय पत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अब योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। करोड़ों रुपये की सड़क योजनाओं में भुगतान की सुस्ती पर सरकार की सख्ती यह संकेत दे रही है कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
ग्रामीण विकास की रफ्तार पर अफसरशाही का ब्रेक?
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें विकास की जीवनरेखा मानी जाती हैं। यदि राशि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया फाइलों में कैद रहे, तो इसका सीधा असर विकास कार्यों और आम जनता पर पड़ता है। अब देखना होगा कि विभाग की इस सख्ती के बाद लंबित भुगतान कितनी तेजी से होता है और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।














