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जब प्रशासन सोता रहा, तब फावड़ा लेकर सड़क पर उतरीं महिलाएं

On: June 13, 2026 9:11 AM
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श्रमदान कर भरे गड्ढे, कहा- हादसे का इंतजार कर रही है व्यवस्था

रिपोर्ट शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता

प्रशासनिक उदासीनता और जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के खिलाफ बड़ाजामदा की महिलाओं ने ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस सड़क और पुलिया की मरम्मत सरकार को करनी थी, उसे आखिरकार आजीविका ग्राम संगठन बस्ती जामदा की बीएचओ (वीओ) की महिलाओं ने अपने श्रमदान से दुरुस्त कर दिया।
गौरतलब है कि 1 जून को “सुखचैन मोटर के पास जर्जर पुलिया बनी हादसे का कारण, मरम्मत नहीं होने पर सड़क जाम की चेतावनी” शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कई दिनों तक जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा रहा और आम लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई।

मौत का रास्ता बनी पुलिया

बड़ाजामदा से नोवामुंड़ी जाने वाले मुख्य मार्ग पर सुखचैन मोटर के समीप स्थित पुलिया की हालत लंबे समय से बदहाल है। पुलिया के बीचों-बीच बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और कई स्थानों पर आर-पार छेद हो गए हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से यह पुलिया हर दिन और कमजोर होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

सरकार नाकाम, महिलाओं ने संभाली जिम्मेदारी

जब प्रशासन ने जनसुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने से मुंह मोड़ लिया, तब गांव की महिलाओं ने खुद फावड़ा और टोकरी उठाई। उन्होंने श्रमदान कर पुलिया और सड़क के गड्ढों में मुरूम और मिट्टी भरकर रास्ते को समतल किया ताकि राहगीरों और वाहन चालकों को राहत मिल सके।
महिलाओं का कहना है कि अगर जनता हर बार अपनी जान बचाने के लिए खुद सड़क बनाएगी, तो फिर जिम्मेदार विभागों की जरूरत ही क्या है?

रोज गुजरते हैं हजारों वाहन, फिर भी कोई सुनवाई नहीं

यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है। इसी रास्ते से टाटानगर से किरीबुरू, बड़बिल और जोड़ा जाने वाली यात्री बसें चलती हैं। साथ ही लौह अयस्क से लदे भारी मालवाहक ट्रकों का दिन-रात आवागमन होता है। इसके बावजूद पुलिया की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग की चुप्पी लोगों के लिए समझ से परे है।

आंदोलन और मांगें बनीं फाइलों की शोभा

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पुलिया निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। नतीजा यह है कि आज जनता को सरकारी काम खुद करना पड़ रहा है।

महिलाओं ने दिया बड़ा संदेश

श्रमदान करने वाली महिलाओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सड़क की मरम्मत नहीं, बल्कि प्रशासन को यह दिखाना है कि जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर खुद भी पहल कर सकती है। लेकिन यह व्यवस्था की विफलता है कि जिस काम के लिए करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, वह काम गांव की महिलाएं अपने श्रम से कर रही हैं।

चेतावनी: हादसे से पहले जागे प्रशासन, नहीं तो होगा सड़क जाम

स्थानीय नागरिकों, वाहन चालकों और सामाजिक संगठनों ने एनएच प्राधिकरण, झारखंड सरकार तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल पुलिया की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जनसुरक्षा के हित में बड़ाजामदा-नोवामुंड़ी मुख्य सड़क मार्ग को अनिश्चितकाल के लिए जाम कर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि “किसी निर्दोष की जान जाने के बाद औपचारिक जांच बैठाने से बेहतर है कि प्रशासन समय रहते जागे और इस जर्जर पुलिया को मौत का जाल बनने से रोके।”

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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