मेघाहातुबुरु में हुल दिवस समारोह आयोजित, सिद्धू-कान्हू के बलिदान को किया नमन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व प्रतियोगिताओं से गूंजा सामुदायिक भवन
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
संथाल एम्पलाई एसोसिएशन, मेघाहातुबुरु-किरीबुरू-बोलनी-गुवा के तत्वावधान में रविवार को सामुदायिक भवन, मेघाहातुबुरु में हुल दिवस बड़े उत्साह, श्रद्धा और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में संथाल हुल के महानायक अमर शहीद सिद्धू-कान्हू के अद्वितीय बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि हुल दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध संघर्ष, स्वाभिमान तथा आदिवासी अस्मिता का प्रतीक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महाप्रबंधक कल्याण माझी, विशिष्ट अतिथि प्रमुख गुरुवारी देवगम, मुखिया लिपि मुंडा, उपमुखिया सुमन मुंडू, मजदूर नेता बीर सिंह मुंडा, सोमाय मुर्मू, श्याम चरण टुडू सहित अन्य अतिथियों ने वीर शहीद स्वतंत्रता सेनानी सिद्धू-कान्हू की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया।

1855 की क्रांति ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी
वक्ताओं ने कहा कि 30 जून 1855 को वर्तमान झारखंड के भोगनाडीह से सिद्धू और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में संथाल हुल की शुरुआत हुई थी। यह विद्रोह अंग्रेजी शासन, जमींदारी व्यवस्था और महाजनी शोषण के खिलाफ आदिवासी समाज की पहली संगठित जनक्रांति थी। हजारों संथाल वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर यह संदेश दिया कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए। इतिहासकार भी संथाल हुल को भारत के स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी क्रांतियों में गिनते हैं।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का प्रयास
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो के संघर्ष, साहस और बलिदान से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उनके आदर्श समाज में समानता, न्याय, भाईचारा और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। हुल दिवस हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहने का संदेश देता है।
प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक
हुल दिवस समारोह के अवसर पर विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया। विजेता प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित भी किया गया।
समाज की एकजुटता का बना संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने कहा कि हुल दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता, शिक्षा, संगठन और विकास के संकल्प को मजबूत करने का भी पर्व है। समाज तभी आगे बढ़ेगा जब नई पीढ़ी अपने इतिहास और विरासत को समझकर उसे आगे बढ़ाने का कार्य करेगी।
समारोह में बड़ी संख्या में संथाल समाज के महिला-पुरुष, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में शहीदों के प्रति सम्मान, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकजुटता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।














