बैंक मोड़ स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के सामने छात्रों का जोरदार प्रदर्शन। किसी राजनीतिक दल के नहीं, स्वतंत्र रूप से उतरे छात्र-छात्राएं
पोस्टर के जरिए 20 वर्षों में 100 से अधिक पेपर लीक और करोड़ों छात्रों के प्रभावित होने का दावा
पेपर लीक को बताया देश की प्रतिभा और भविष्य पर सबसे बड़ा हमला
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों को लेकर किरीबुरू और मेघाहातुबुरू के दर्जनों छात्र-छात्राएं 23 जुलाई को बैंक मोड़ स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने एकत्र हुए और जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल, छात्र संगठन या संस्था के बैनर तले नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़क पर उतरे हैं।
छात्रों ने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा का अपराध नहीं, बल्कि देश की प्रतिभाओं, युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। मेहनत करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के सपनों को कुछ लोग पैसे और भ्रष्टाचार के दम पर कुचल रहे हैं।

‘पैसे वाले खरीद रहे सफलता, प्रतिभाशाली युवा हो रहे पीछे’
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग पेपर खरीदकर अपने कमजोर बच्चों को गलत तरीके से सफल करा देते हैं, जबकि वर्षों तक मेहनत करने वाले प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इससे युवाओं में निराशा, अवसाद और व्यवस्था के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।
दोषियों को फांसी और संपत्ति जब्त करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि पेपर लीक कराने वाले गिरोह, बिचौलियों और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ फांसी की सजा का प्रावधान किया जाए तथा उनकी पूरी संपत्ति जब्त करने का कानून बनाया जाए, ताकि भविष्य में कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके।
पोस्टर में दिखाए गए प्रमुख आंकड़े
छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान पेपर लीक से जुड़े पोस्टर और स्लोगन भी प्रदर्शित किए। पोस्टर में दिए गए प्रमुख दावे इस प्रकार हैं—
* 2006 से 2026 के बीच 100 से अधिक बड़े पेपर लीक के मामले सामने आने का दावा।
* 20 वर्षों में 2 से 3 करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित होने का उल्लेख।
* 2015 AIPMT पेपर लीक से लगभग 6.3 लाख छात्र प्रभावित।
* 2017 SSC CGL विवाद से लगभग 30 लाख अभ्यर्थी प्रभावित।
* 2018 CBSE कक्षा 10 एवं 12 पेपर लीक से लगभग 28 लाख छात्र प्रभावित।
* 2021 REET (राजस्थान) पेपर लीक से करीब 16 लाख अभ्यर्थी प्रभावित।
* 2022 बिहार BPSC विवाद में लगभग 6 लाख अभ्यर्थियों पर असर।
* 2024 NEET-UG विवाद से करीब 24 लाख अभ्यर्थी प्रभावित।
* पोस्टर में 2026 NEET-UG को लेकर भी कथित लीक का उल्लेख किया गया है, जिसमें लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों का जिक्र किया गया है। (यह दावा पोस्टर में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है।)
पोस्टर में वर्षवार दर्शाए गए प्रमुख मामले
पोस्टर के अनुसार 2014 से 2026 के बीच AIPMT, NEET, SSC, CBSE, UPTET, JEE, UKSSSC, BPSC, UGC-NET, UP पुलिस भर्ती, CTET, RRB लोको पायलट समेत कई परीक्षाओं में पेपर लीक या लीक के आरोप सामने आए। कई परीक्षाएं रद्द हुईं, जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की और लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
पेपर लीक से होने वाले बड़े नुकसान
* मेहनती और ईमानदार छात्रों का भविष्य बर्बाद होता है।
* शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
* युवाओं में तनाव, अवसाद और बेरोजगारी की भावना बढ़ती है।
* भ्रष्टाचार और संगठित अपराध को बढ़ावा मिलता है।
* सरकार पर दोबारा परीक्षा कराने का करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
* योग्य उम्मीदवारों की जगह अयोग्य लोगों के चयन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पूरे प्रशासनिक और सरकारी तंत्र की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
छात्रों का संदेश
प्रदर्शन के अंत में छात्रों ने एक स्वर में कहा कि “हम निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी भर्ती और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। यदि समय रहते पेपर लीक पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह देश की प्रतिभा और विश्वास दोनों को खोखला कर देगा।”














