किरीबुरू आजीविका महिला संकुल संगठन की वार्षिक आम सभा में गूंजा महिला सशक्तीकरण का संदेश
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू। ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के तहत संचालित किरीबुरू आजीविका महिला संकुल संगठन स्वावलम्बी सहकारी समिति लिमिटेड, किरीबुरू की वार्षिक आम सभा सामुदायिक भवन किरीबुरू परिसर में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ आयोजित की गई। कार्यक्रम में किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुवा, बाराईबुरू, टाटीबा, करमपदा सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला समूहों की सदस्य शामिल हुईं।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण महिलाओं को यदि संगठित होकर आगे बढ़ने का अवसर और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं कर सकतीं, बल्कि गांव और समाज की तस्वीर बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महिला समिति की अध्यक्षा स्वाती शिरपुरकर, विशिष्ट अतिथि जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी, मुखिया पार्वती कीड़ो, लिपि मुंडा एवं प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, जेएसएलपीएस के बीएमपी रूपेश कुमार सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दर्जनों महिलाओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को प्रभावित किया और पूरा वातावरण उत्साह एवं उमंग से भर गया।
‘हर दीदी दो महिलाओं को जोड़ें’—स्वाती शिरपुरकर
मुख्य अतिथि स्वाती शिरपुरकर ने महिला समूहों की सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि आज महिलाएं अपनी मेहनत और सामूहिक शक्ति के बल पर स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार, समाज और देश को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने समूह से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक दीदी को चाहिए कि वह कम से कम दो अन्य महिलाओं को आजीविका अभियान से जोड़ें, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इससे पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरती है। जब महिला के हाथ में आय का साधन आता है तो बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलती है।

100 लखपति दीदियों को किया गया चिन्हित
वार्षिक आम सभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों और गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। सीएलएफ मैनेजर आशियानी भेंगरा ने वर्षभर की प्रगति एवं कार्यों का विस्तृत विवरण सदस्यों के समक्ष रखा।
इस दौरान बताया गया कि संगठन की ओर से महिलाओं की आजीविका बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए। 100 लखपति दीदियों को चिन्हित कर उनकी आजीविका बढ़ाने की दिशा में कार्य किया गया।
यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल किसी एक छोटे रोजगार तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उनकी आय के स्थायी और विविध स्रोत विकसित करना है।

सेनेटरी पैड यूनिट से रोजगार का नया रास्ता
वर्ष 2025-26 की प्रमुख उपलब्धियों में सेनेटरी पैड यूनिट की स्थापना भी शामिल रही। इससे महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता का नया अवसर तैयार हुआ है।
ऐसी इकाइयां महिलाओं को उत्पादन, प्रबंधन, बिक्री और विपणन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर समूह की आय बढ़ाने का अवसर भी मिलता है।
वनोपज से भी आय बढ़ाने की पहल
झामको फेड की ओर से संकुल संगठन से जुड़े सभी सदस्यों को वनोपज किट प्रदान किया गया। सारंडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वन आधारित गतिविधियों से जुड़ी है।
वनोपज किट के माध्यम से महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। इससे जंगल से मिलने वाले संसाधनों को केवल घरेलू उपयोग तक सीमित रखने के बजाय आय के साधन के रूप में विकसित करने का अवसर मिलता है।
स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता पर भी जोर
संकुल संगठन ने महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाया।
महिला समूहों के माध्यम से स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी गांव-गांव तक पहुंचने से महिलाओं और उनके परिवारों में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सामूहिक आवाज उठाने से महिलाओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने का अवसर भी मिलता है।
2026-27 में डिजिटल और वित्तीय मजबूती का लक्ष्य
वार्षिक आम सभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई। इसमें शत-प्रतिशत डिजिटल ट्रांजेक्शन, SHG/VO/CLF का LOKOS ट्रांजेक्शन, सभी SHG/VO/CLF की शत-प्रतिशत कट ऑफ LOKOS एंट्री, शत-प्रतिशत KYC पूरा करना, समूह आधारित व्यवसाय शुरू करना और शत-प्रतिशत ऋण पुनर्भुगतान जैसे लक्ष्य शामिल किए गए हैं।
इन योजनाओं का सीधा लाभ महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से संचालित करने में मिल सकता है। डिजिटल लेन-देन से आर्थिक गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने में सुविधा होगी, जबकि समय पर ऋण चुकाने से समूहों की वित्तीय विश्वसनीयता मजबूत होगी और भविष्य में ऋण एवं अन्य वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।

समूह से जुड़कर महिलाओं को मिल रहा सामूहिक सहारा
महिला स्वयं सहायता समूहों की सबसे बड़ी ताकत सामूहिकता है। अकेली महिला के लिए बैंक, बाजार, ऋण, प्रशिक्षण या व्यवसाय शुरू करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन समूह के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे का सहयोग करती हैं।
समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत की आदत विकसित करने, सामूहिक निर्णय लेने, वित्तीय लेन-देन समझने, ऋण प्राप्त करने और छोटे व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलता है। इससे महिलाओं में आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
आज कई महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ कृषि, पशुपालन, वनोपज, खाद्य प्रसंस्करण, छोटे कारोबार और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ रही है।
22 VO की दीदियों ने दिखाई एकजुटता
कार्यक्रम में संकुल संगठन की अध्यक्ष ग्रेस बोदरा, सचिव सुनीता तिर्की, कोषाध्यक्ष जीवंती कुंडलना, सीसी चिंतामणि सोय, आईपीआरपी इंद्रजीत गोप, कनक मिश्रा, विभा मिश्रा, लक्ष्मी कुमारी सहित संगठन से जुड़े पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
गुवा, बाराईबुरू, टाटीबा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, करमपदा सहित विभिन्न क्षेत्रों की सभी 22 VO की दीदियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।
कार्यक्रम का मंच संचालन रीना दास एवं नेहा हेंब्रम ने किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बढ़ा उत्साह
वार्षिक आम सभा केवल उपलब्धियों और योजनाओं तक सीमित नहीं रही। महिलाओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। गीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम के दौरान एक बात स्पष्ट रूप से दिखाई दी कि आज ग्रामीण महिलाएं केवल परिवार की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली भूमिका से आगे बढ़कर आर्थिक, सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
आजीविका समूहों के माध्यम से महिलाओं को मिला यह सामूहिक मंच उनके लिए आर्थिक मजबूती के साथ-साथ आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता, नेतृत्व और सामाजिक पहचान का भी माध्यम बन रहा है। यदि आगामी वर्षों में तय कार्ययोजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो किरीबुरू क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खुल सकते हैं।










