भ्रष्टाचार नक्सल खदान
अपराध राजनीति खेल समस्या स्वास्थ्य कार्यक्रम शिक्षा दुर्घटना सांस्कृतिक मनोरंजन मौसम कृषि ज्योतिष काम

सारंडा-पोड़ाहाट के वन दफ्तर चाईबासा में क्यों? भारत आदिवासी पार्टी ने उठाया बड़ा सवाल

On: July 3, 2026 5:58 PM
Follow Us:
---Advertisement---

“जंगल यहां, संकट यहां, तो दफ्तर दूर क्यों?” — सुशील बारला ने सरकार से मांगा वन प्रमंडलीय कार्यालयों का तत्काल हस्तांतरण

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

भारत आदिवासी पार्टी पश्चिम सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने सारंडा और पोड़ाहाट वन क्षेत्रों के प्रशासनिक ढांचे को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए सरकार से तत्काल वन प्रमंडलीय कार्यालयों के हस्तांतरण की मांग की है। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा कि जब जंगल, संकट और चुनौतियां मनोहरपुर, किरीबुरू और सोनुवा क्षेत्र में हैं, तो फिर वन प्रमंडल कार्यालय चाईबासा में रखने का औचित्य क्या है?
उन्होंने कहा कि सरंडा वन प्रमंडल लगभग 860.44 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसका अधिकांश हिस्सा मनोहरपुर और नोवामुंडी प्रखंडों में आता है। ऐसे में क्षेत्र से सटे स्थान पर प्रशासनिक कार्यालय होने से वन प्रबंधन अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकेगा।

जंगल में संकट, लेकिन फैसले शहर से!

सुशील बारला ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान देरी से होता है, क्योंकि प्रशासनिक नियंत्रण दूरस्थ कार्यालयों से संचालित हो रहा है। इसका सीधा असर जंगल की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों पर पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जंगल में आग लगे, अवैध कटाई हो, वन्यजीव-मानव संघर्ष हो या कोई आकस्मिक आपदा—हर बार कार्रवाई में देरी क्यों हो? यदि कार्यालय मनोहरपुर और सोनुवा में होंगे तो त्वरित निर्णय और राहत कार्य आसान होंगे।

वनाधिकार कानून का क्रियान्वयन भी प्रभावित

बारला ने कहा कि हमारी पार्टी लंबे समय से यह मांग उठा रही है कि वनाधिकार अधिनियम के तहत आदिवासियों और वनवासियों के अधिकारों को जमीन पर लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि वनाधिकार पट्टा, लघु वनोपज प्रबंधन, विकास योजनाओं की निगरानी और ग्रामसभा आधारित अधिकारों के क्रियान्वयन में भी स्थानीय प्रमंडलीय कार्यालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

खनन पर निगरानी का सवाल भी बड़ा

सारंडा क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण लौह अयस्क भंडारों में से एक है। यहां बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां चल रही हैं। सुशील बारला ने आरोप लगाया कि दूरस्थ प्रशासनिक व्यवस्था के कारण पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन और वन संरक्षण की निगरानी कमजोर हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रमंडलीय कार्यालय स्थानीय स्तर पर स्थापित हो, तो खनन कंपनियों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखी जा सकेगी और पर्यावरणीय क्षति को रोका जा सकेगा।

ईको-टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बल

उन्होंने कहा कि सारंडा और पोड़ाहाट जैसे प्राकृतिक और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्रों में यदि प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ती हैं तो इससे ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, परिवहन, आवास और अन्य सेवाओं के अवसर बढ़ेंगे।

सरकार से सीधी मांग

भारत आदिवासी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि—
* सारंडा वन क्षेत्र का प्रमंडलीय कार्यालय चाईबासा से हटाकर मनोहरपुर में स्थापित किया जाए।
* पोड़ाहाट वन क्षेत्र का प्रमंडलीय कार्यालय चाईबासा से हटाकर सोनुवा में स्थापित किया जाए।
सुशील बारला ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि जंगल, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा का सवाल है।

“जंगल बचाना है तो निर्णय भी जंगल के करीब लेने होंगे”

अपने बयान के अंत में उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा—
“सारंडा और पोड़ाहाट के जंगलों की सुरक्षा सिर्फ कागजों से नहीं होगी। अगर सरकार सच में वन संरक्षण और आदिवासी हितों को लेकर गंभीर है, तो उसे प्रशासन को जंगल के करीब लाना होगा।”
अब यह मांग क्षेत्रीय राजनीति और वन प्रशासन में नई बहस को जन्म दे रही है।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment