10 लाख के इनामी जोनल कमांडर समेत चार सक्रिय माओवादी पुलिस के सामने सरेंडर
ऑपरेशन नवजीवन-III का बड़ा असर, 2025-26 में 49 नक्सलियों ने डाले हथियार, 22 मारे गए और 60 गिरफ्तार
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
कभी माओवादी गतिविधियों का मजबूत गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में अब नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा बलों के लगातार अभियान, नक्सलियों की घेराबंदी, संगठन के भीतर बढ़ते दबाव और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के असर से माओवादी संगठन की जमीनी पकड़ तेजी से कमजोर हुई है। इसी कड़ी में मंगलवार को एक और बड़ी सफलता पुलिस को मिली, जब 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य समेत भाकपा माओवादी के चार सक्रिय सदस्यों ने पुलिस एवं सीआरपीएफ के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
पश्चिमी सिंहभूम पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के निर्देश पर झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और झारखंड जगुआर द्वारा पश्चिमी सिंहभूम में माओवाद के खिलाफ लगातार संयुक्त और प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यधारा से भटके नक्सलियों को वापस समाज में लाने के लिए सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का प्रचार-प्रसार तथा सामुदायिक पुलिसिंग भी लगातार की जा रही है।

ऑपरेशन नवजीवन-III में बड़ी कामयाबी
इसी अभियान के तहत 11 अगस्त 2026 को ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ के दौरान कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के सुदूर जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय भाकपा माओवादी संगठन के चार सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मारू उर्फ विक्रम उर्फ डांगिल उर्फ तुड़ुई उर्फ जयराम प्रमुख है।
सालुका कायम के अलावा तीन अन्य दस्ता सदस्यों ने भी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। पुलिस के अनुसार इन सभी का संगठन के खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों में आपराधिक इतिहास रहा है।
10 लाख का इनामी जोनल कमेटी सदस्य भी आया मुख्यधारा में
आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मारू उर्फ विक्रम उर्फ डांगिल उर्फ तुड़ुई उर्फ जयराम के खिलाफ चाईबासा और सरायकेला क्षेत्र में कुल 96 मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें चाईबासा में 90 तथा सरायकेला में छह मामले शामिल हैं।
उसके आत्मसमर्पण के साथ पुलिस ने एक महत्वपूर्ण हथियार भी बरामद किया है। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन, 843 कारतूस, रेडियो सेट सहित अन्य सामग्री बरामद की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह माओवादी संगठन के जोनल कमेटी स्तर का सक्रिय सदस्य था और उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
तीन दस्ता सदस्यों ने भी छोड़ा हिंसा का रास्ता
सालुका कायम के साथ तीन अन्य सक्रिय दस्ता सदस्यों ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें कोदामुनी कोड़ा उर्फ कोदन मुनी कोड़ा उर्फ कितामाई उर्फ गुटला कोड़ा उर्फ बोनाई कोड़ा, पिंकी पूर्ति उर्फ सुकांती पूर्ति उर्फ मेघो पूर्ति तथा अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम उर्फ मुक्ता उर्फ चुन्नी उर्फ जकड़ा शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार कोदामुनी कोड़ा के खिलाफ चाईबासा में सात मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक वायरलेस सेट, एक मैगजीन, 697 कारतूस, रेडियो सेट सहित अन्य सामग्री बरामद की गई।
वहीं पिंकी पूर्ति के खिलाफ चाईबासा में 13 मामले दर्ज बताए गए हैं। उसके पास से एक वायरलेस सेट, एक मैगजीन, 639 कारतूस और रेडियो सेट बरामद किया गया।
चौथी आत्मसमर्पित महिला नक्सली अनिता तामसोय के खिलाफ चाईबासा में 12 और सरायकेला में एक मामला यानी कुल 13 मामले दर्ज हैं। उसके पास से एक इंसास राइफल, पांच मैगजीन, 97 कारतूस, रेडियो सेट एवं अन्य सामग्री बरामद हुई।

2025 से अब तक टूटती गई माओवादी कमर
पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 में भाकपा माओवादी के कुल 10 नक्सलियों ने चाईबासा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया और झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाया।
इसके बाद अभियान को और तेज करते हुए ऑपरेशन ‘नवजीवन-I’ चलाया गया। इसके तहत 21 मई 2026 को कुल 27 नक्सल कमांडर एवं दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें छह एसजेडसीएम, छह एसीएम और 13 दस्ता सदस्य शामिल थे। आत्मसमर्पण करने वालों के पास से 16 हथियार और 3,082 गोलियां बरामद की गई थीं।
नवजीवन-II में भी 14 नक्सलियों ने डाले हथियार
इसके बाद 28 जुलाई 2026 को ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के तहत एक और बड़ी सफलता मिली। इस अभियान के दौरान कुल 14 नक्सल कमांडर एवं दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें आरसीएम, जेडसीएम, एसजेडसीएम, एसीएम स्तर के सदस्यों के साथ दस्ता सदस्य भी शामिल थे।
इनके आत्मसमर्पण के दौरान 10 हथियार और 1,412 गोलियां पुलिस के समक्ष जमा की गईं। लगातार दो चरणों में बड़ी संख्या में सक्रिय एवं महत्वपूर्ण कैडरों के आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन की कमर और कमजोर हुई।
49 ने किया आत्मसमर्पण, 22 मारे गए, 60 गिरफ्तार
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिले में वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक कुल 49 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। वहीं मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए, जबकि 60 नक्सलियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इस दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में हथियार एवं आईईडी समेत अन्य नक्सली सामग्री भी बरामद की है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कभी नक्सलियों के प्रभाव वाला पश्चिमी सिंहभूम अब सुरक्षा बलों के निरंतर अभियान से तेजी से बदल रहा है।
सारंडा में अब नक्सलवाद की आखिरी सांस!
सारंडा का घना जंगल वर्षों तक माओवादी गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। पोड़ाहाट और कोल्हान के दुर्गम जंगल-पहाड़ी इलाकों में माओवादी दस्ते लंबे समय तक अपनी गतिविधियां चलाते रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी और संयुक्त अभियानों ने उनके सुरक्षित ठिकानों को भी चुनौती दी है।
विशेषकर सारंडा के सुदूर जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में नए कैंपों की स्थापना, लगातार सर्च अभियान और नक्सलियों की घेराबंदी ने संगठन को अपने पुराने प्रभाव क्षेत्र से पीछे हटने के लिए मजबूर किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की सामुदायिक पहुंच बढ़ने और विकास योजनाओं के विस्तार ने भी नक्सलियों के प्रभाव को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ऐसे में 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य का आत्मसमर्पण महज एक नक्सली के हथियार डालने की घटना नहीं, बल्कि सारंडा और कोल्हान के जंगलों में माओवादी संगठन की कमजोर होती अंतिम कड़ी का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
मुठभेड़ के साथ पुनर्वास नीति भी बनी हथियार
पुलिस का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान केवल मुठभेड़ और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के माध्यम से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से लगातार नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि संगठन के कई सक्रिय सदस्य अपने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक चाईबासा जिले के विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नक्सल विरोधी अभियान, घेराबंदी और संगठन के अंदरूनी शोषण से त्रस्त कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

सालों पुराने लाल आतंक के अंत की ओर सारंडा, कोल्हान
पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा, कोल्हान क्षेत्र कई दशकों से नक्सलवाद और हिंसा की चुनौती झेलता रहा है। जंगलों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और ग्रामीण इलाकों में नक्सली गतिविधियां यहां की बड़ी समस्या रही हैं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
लगातार अभियान, मुठभेड़ों में नक्सलियों के मारे जाने, गिरफ्तारियों और बड़े कैडरों के आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन का नेटवर्क लगातार सिमट रहा है। सारंडा और पोड़ाहाट के जिन इलाकों में कभी सुरक्षा बलों के लिए पहुंच बनाना चुनौती माना जाता था, वहां अब अभियान तेज हो चुके हैं।
मंगलवार का आत्मसमर्पण इसी बदलती तस्वीर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर समेत चार सक्रिय सदस्यों का हथियार डालना इस बात का संकेत है कि सारंडा-कोल्हान में माओवादी संगठन का प्रभाव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
विकास की नई राह पर बढ़ रहा चाईबासा
पुलिस प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ पश्चिमी सिंहभूम अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
पुलिस की ओर से ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या सूचना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए ग्रामीणों में विश्वास पैदा करना और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य बनाना है।
सारंडा के जंगलों में कभी गूंजने वाली बंदूकों की आवाज अब कमजोर पड़ रही है। आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों के लगातार अभियान के बीच माओवादी संगठन का प्रभाव लगभग समाप्ति की ओर है। अब चुनौती इस सफलता को स्थायी शांति, विकास और ग्रामीणों के भरोसे में बदलने की है।










