अवैध दुकान निर्माण पर तत्काल रोक और सरकारी भूमि की मापी की मांग; कार्रवाई नहीं हुई तो अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना व जनजागरूकता अभियान की चेतावनी
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
जगन्नाथपुर।
जैतगढ़ के ऐतिहासिक एवं प्रमुख साप्ताहिक बाजार की सरकारी/सार्वजनिक भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध रूप से स्थायी दुकान एवं अन्य संरचनाओं के निर्माण का मामला अब अनुमंडल प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष राई भूमिज के नेतृत्व में भाजपाइयों ने जगन्नाथपुर अनुमंडल के अनुमंडल विकास पदाधिकारी (एसडीओ) को मांगपत्र सौंपकर सरकारी भूमि पर हो रहे कथित अतिक्रमण और निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने तथा बाजार क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की।
भाजपा नेताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की स्थल जांच कराने, सरकारी भूमि की मापी कराने और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन के साथ जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

हर शनिवार लगता है क्षेत्र का प्रमुख साप्ताहिक बाजार
भाजपा नेताओं ने अपने मांगपत्र में बताया कि जैतगढ़ में प्रत्येक शनिवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। यहां दूर-दराज के ग्रामीण, किसान, छोटे दुकानदार और स्थानीय व्यवसायी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं, सब्जियों और अन्य सामान की खरीद-बिक्री के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में बाजार की सार्वजनिक भूमि का उपयोग आम लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए सुचारु रूप से होना जरूरी है।
बाजार की जमीन पर लगातार निर्माण का आरोप
मांगपत्र में आरोप लगाया गया है कि बाजार की सरकारी/सार्वजनिक भूमि पर लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है और स्थायी रूप से दुकान एवं अन्य संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
भाजपा नेताओं के अनुसार, बाजार के कुछ हिस्सों में दुकान निर्माण के लिए छत ढलाई तथा अल्बेस्टर लगाने का काम भी किया जा रहा है। वहीं कई स्थानों पर निर्माण सामग्री के रूप में ईंट, बालू और गिट्टी का भंडारण किए जाने की बात कही गई है।
इन गतिविधियों के कारण बाजार में उपलब्ध खुली जगह लगातार कम होती जा रही है।
छोटे दुकानदारों और ग्रामीणों के सामने जगह का संकट
भाजपा नेताओं का कहना है कि जैतगढ़ साप्ताहिक बाजार में बड़ी संख्या में छोटे और स्थानीय दुकानदार अपनी आजीविका के लिए दुकान लगाते हैं। ग्रामीण किसान भी अपनी उपज लेकर बाजार पहुंचते हैं।
यदि सार्वजनिक बाजार की भूमि पर स्थायी निर्माण और अतिक्रमण का सिलसिला जारी रहा तो भविष्य में छोटे दुकानदारों और ग्रामीणों के लिए दुकान लगाने तक की जगह का संकट उत्पन्न हो सकता है।
नेताओं ने प्रशासन से इस मामले को केवल जमीन के अतिक्रमण के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छोटे दुकानदारों की आजीविका से जुड़े मुद्दे के रूप में देखने की मांग की है।
पहले मापी हो, फिर साफ हो तस्वीर
भाजपा की ओर से प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे बाजार क्षेत्र की स्थल जांच और सरकारी भूमि की विधिवत मापी कराई जाए।
मांगपत्र में कहा गया है कि मापी के बाद यह स्पष्ट किया जाए कि सरकारी अथवा सार्वजनिक भूमि कितनी है और उस पर कहां-कहां अतिक्रमण या निर्माण किया गया है।
इसके बाद सरकारी भूमि पर किए गए कथित अवैध निर्माण के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
“सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे”
राई भूमिज के नेतृत्व में सौंपे गए मांगपत्र में स्पष्ट कहा गया कि बाजार की सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा स्थानीय एवं छोटे दुकानदारों के लिए बाजार में उचित स्थान सुनिश्चित किया जाए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि बाजार की जमीन किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपयोग के लिए है। इसलिए प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में अतिक्रमण का दायरा और अधिक न बढ़े।
कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरने की चेतावनी
भाजपा नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगपत्र पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और कथित अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगी तो पार्टी की ओर से आंदोलन किया जाएगा।
इसके तहत अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया गया है।
अब पूरे मामले में निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर है। प्रशासन द्वारा स्थल जांच और सरकारी भूमि की मापी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाजार की भूमि पर वास्तविक रूप से कितना अतिक्रमण हुआ है और किन निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है।
जैतगढ़ बाजार का सवाल—सार्वजनिक जमीन बचेगी या बढ़ता जाएगा कब्जा?
जैतगढ़ के साप्ताहिक बाजार से हजारों ग्रामीणों और छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी जुड़ी है। ऐसे में बाजार की जमीन को लेकर उठे सवाल ने स्थानीय स्तर पर बहस तेज कर दी है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी है।



















